आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

द एपिक सिटीः ये किताब नहीं, कोलकाता के नाम एक प्रेमपत्र है!

द एपिक सिटी
                
                                                         
                            कुछ किताबें दिल खोलकर लिखी जाती हैं। कुछ किताबें वक्त चुराकर पढ़ी जाती हैं। ‘द एपिक सिटी’ को लेखक ने जितना दिल खोलकर लिखा है, ये किताब पाठक से भी उतना ही वक्त चुराकर पढ़े जाने की मांग करती है। आपका कोलकाता से कोई रिश्ता हो या न हो, आप कभी कोलकाता गए हों या न गए हों, फिर भी इसके एक-दो पन्ने पढ़ने के बाद इसमें सिलसिलेवार तरीके से ऐसा बहुत कुछ मिलता जाता है,
                                                                 
                            

जिसे पढ़े बिना छोड़ा नहीं जा सकता। कोई इसे जनरल नॉलेज बढ़ाने के लालच में पढ़ सकता है, तो कोई एक शहर को समझने के लिए। दोनों ही मामलों में लेखक की कथनी तारीफ के काबिल हंै। कुशनावा चौधरी ने जितनी बारीकी से कोलकाता को देखा है, उतनी ही खूबसूरती से लिखा भी है।

किताब पढ़ने के बाद समझ आता है कि कुछ लोग इसे प्यार करते हैं और कुछ लोग नफरत करते हैं। लेकिन ऐसे कम ही लोग होंगे, जो इस शहर को अच्छी तरह जानते हैं। इससे पहले भी कोलकाता के बारे में कई किताबें लिखी जा चुकी हैं। इनमें जियोफ्रे मूरहाउस की ‘कैलकटा’ से लेकर अमित चौधरी की ‘टू ईयर्स इन द सिटी’ तक शामिल हैं। लेकिन यह किताब इन सबमें खास है।  आगे पढ़ें

8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर