अमेरिका पीछे हटा, हूती आगे बढ़े और अब सऊदी अरब की नजर पाकिस्तान और तुर्किये पर है। यमन में हूतियों ने लाल सागर के अहम इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। दूसरी तरफ अमेरिका ने हूतियों के साथ मस्कट में बातचीत कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाज निशाने पर न आएं। ऐसे में सऊदी अरब के सामने बड़ा सवाल है अगर अमेरिका सीधे जंग में नहीं उतरेगा, तो हूतियों को कौन रोकेगा?
अब यहीं से पाकिस्तान की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। क्योंकि मक्का में हुआ रक्षा समझौता कहता है कि एक सदस्य पर हमला, तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री भी कह चुके हैं कि सऊदी अरब पर हमला होने की स्थिति में समझौता सक्रिय हो सकता है। लेकिन अगर पाकिस्तान सचमुच हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है, तो क्या होगा? क्या ईरान सीधे इस लड़ाई में कूदेगा? क्या लाल सागर का संकट और बढ़ेगा? और क्या इसका असर भारत तक पहुंचेगा?