अरब सागर में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के भीतर भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं से जुड़ी एक घटना ने दोनों देशों के बीच समुद्री गतिविधियों को लेकर नया तनाव पैदा कर दिया है। भारतीय नौसेना के एक जहाज और पाकिस्तानी नौसेना के पोत के बीच टक्कर के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया है। भारत ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए पाकिस्तानी प्रभारी राजनयिक यानी चार्ज डी अफेयर्स को विदेश मंत्रालय में तलब किया।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बुधवार को पाकिस्तानी प्रभारी राजनयिक को विदेश मंत्रालय बुलाया गया और उनके सामने समुद्र में पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के कथित तौर पर अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर आचरण को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई। भारत की ओर से कहा गया कि इसी आचरण के कारण भारतीय नौसेना की एक इकाई से टक्कर हुई।
हालांकि, भारत सरकार के अनुसार इस टक्कर में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन मामला सिर्फ एक समुद्री हादसे तक सीमित नहीं है। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक पोत के आचरण को दोनों देशों के बीच हुए एक महत्वपूर्ण समझौते से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। भारत के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसैनिक पोत का आचरण अप्रैल 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के अनुच्छेद 10 के प्रावधानों के विपरीत था। यह समझौता दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही से जुड़ी गतिविधियों के लिए अग्रिम सूचना देने से संबंधित है।
यानी भारत का कहना है कि समुद्र में सैन्य गतिविधियों के दौरान दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ लागू समझौतों और तय प्रावधानों का पालन करना चाहिए। इसी संदर्भ में भारत ने पाकिस्तानी नौसेना के पोत के व्यवहार पर आपत्ति जताई है।
इस पूरे मामले में भारत ने सिर्फ नई दिल्ली में मौजूद पाकिस्तानी राजनयिक को तलब कर विरोध दर्ज नहीं कराया, बल्कि इस्लामाबाद में भी पाकिस्तान सरकार के सामने मामला उठाने का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद स्थित भारत के प्रभारी राजनयिक को निर्देश दिया है कि वह पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के समक्ष भारत की आपत्ति दर्ज कराएं।
भारत का संदेश साफ है कि समुद्र में सैन्य इकाइयों की गतिविधियों के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जानी चाहिए। खास तौर पर तब, जब दोनों देशों की नौसैनिक इकाइयां अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सक्रिय हों। किसी भी तरह की गलतफहमी या लापरवाही से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने का खतरा रहता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि समुद्र में सभी सैन्य इकाइयों को उचित सावधानी बरतनी चाहिए और भारत-पाकिस्तान के बीच लागू संबंधित समझौतों के प्रावधानों का सम्मान करना चाहिए। इसका मकसद भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना है।
फिलहाल टक्कर से किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है, लेकिन भारत ने जिस तरह इस घटना को राजनयिक स्तर पर उठाया है, उससे साफ है कि नई दिल्ली इसे केवल एक सामान्य समुद्री घटना मानकर छोड़ना नहीं चाहती। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई टक्कर, दूसरी तरफ 1991 के समझौते का हवाला और फिर दोनों राजधानियों में विरोध—इस पूरे घटनाक्रम ने भारत-पाकिस्तान के बीच समुद्री सैन्य गतिविधियों पर निगाहें बढ़ा दी हैं।