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Middle East Tension: अमेरिका के लापता पायलट पर ट्रंप के बयान ने चौंकाया, ईरान ने बनाया बंधक!

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Sat, 04 Apr 2026 12:19 PM IST

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्ते एक बार फिर बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं। हालिया घटनाक्रम ने इस संघर्ष को और गंभीर बना दिया है, जहां एक ओर सैन्य टकराव तेज हो रहा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान चर्चा का केंद्र बन गया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि एक अमेरिकी सैन्य विमान के गिराए जाने से ईरान के साथ संभावित बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, “नहीं, बिल्कुल नहीं… यह युद्ध है, हम युद्ध में हैं।” उनके इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका इस स्थिति को बेहद गंभीरता से देख रहा है और पीछे हटने के मूड में नहीं है।

दरअसल, रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक अमेरिकी A-10 अटैक विमान को मार गिराया है। हालांकि इस दावे की अभी तक किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हो पाई है। A-10 विमान को खासतौर पर जमीन पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है और यह अमेरिकी वायुसेना का एक अहम हिस्सा माना जाता है।

इसी बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जानकारी के मुताबिक एक अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट भी ईरान के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इस विमान में दो क्रू मेंबर सवार थे। अमेरिकी सेना ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक सदस्य को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि दूसरे क्रू मेंबर की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है और उसकी तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है।

इस मामले पर पेंटागन ने अमेरिकी संसद की हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी को जानकारी दी है। पेंटागन के अनुसार, एक सैनिक को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन दूसरे की स्थिति अज्ञात बनी हुई है। इसका मतलब यह है कि अमेरिकी रक्षा विभाग को फिलहाल यह जानकारी नहीं है कि वह सैनिक कहां है और किस हालत में है।

जब राष्ट्रपति ट्रंप से यह पूछा गया कि अगर लापता सैनिक को ईरान नुकसान पहुंचाता है तो अमेरिका क्या प्रतिक्रिया देगा, तो उन्होंने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि “हमें उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा।” ट्रंप का यह बयान यह दर्शाता है कि अमेरिका इस संवेदनशील मुद्दे पर फिलहाल सावधानी बरत रहा है।

इस घटना को खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय बाद ऐसा हुआ है जब किसी अमेरिकी लड़ाकू विमान को दुश्मन इलाके में मार गिराया गया हो। इससे पहले ऐसा मामला 2003 में इराक युद्ध के दौरान सामने आया था। इस तुलना से मौजूदा स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

वहीं दूसरी ओर, इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत पर भी असर पड़ा है। खबरों के मुताबिक ईरान ने प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिससे शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। ईरानी मीडिया ने कुछ तस्वीरें भी जारी की हैं, जिनमें कथित तौर पर गिरे हुए विमान के मलबे के टुकड़े दिखाई दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो यह तनाव एक बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है, जिसका असर पूरे मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।

फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश इस तनाव को कूटनीतिक रास्ते से सुलझाने की कोशिश करेंगे या फिर यह टकराव और गहराता जाएगा।

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