पिथौरागढ़। सीमांत जिले में आठूं पर्व धूमधाम और आस्था के साथ मनाया गया। कई जगह मां गौरा और भगवान महेश्वर को पारंपरिक गीतों के साथ विदाई दी गई। वहीं नगर के रामलीला मैदान में आठूं मां गौरा के साथ भगवान महेश्वर की प्रतिमा की स्थापना हुई। इस दौरान महिलाओं और पुरुषों ने सामूहिक रूप से झोड़ा-चांचरी का गायन कर लोक संस्कृति के रंग बिखेरे। वहीं विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुति दी। रामलीला मैदान में आयोजित आठूं महोत्सव के दूसरे दिन खड़कोट से भगवान महेश्वर की प्रतिमा के साथ झांकी निकाली गई। नगर के विभिन्न मार्गों से मां गौरा और भगवान महेश्वर के जयकारों और ढोल-नगाड़ों के निकली झांकी रामलीला मैदान में पहुंची। वहां प्रतिमा को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्थापित किया गया। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी भी झांकी में शामिल हुए। इसके बाद मैदान में झोड़ा-चांचरी और पारंपरिक खेलों की धूम रही। महिलाओं और पुरुषों ने ओ बांज, झुपराली बांज, सोला सोल्यानी सहित विभिन्न पारंपरिक गीतों का गायन किया। झोड़ा-चांचरी की प्रस्तुति से लोक संस्कृति के रंग बिखेरे। देर शाम तक झोड़ा-चांचरी, खेलों का गायन होता रहा इसका आनंद लेने के लिए दर्शकों की खासी भीड़ रही। इस मौके पर महोत्सव समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह माहरा, दीपक गुप्ता, रेखा जोशी सहित कई लोग मौजूद रहे। संचालन दीवान सिंह वल्दिया और जनार्दन उप्रेती ने किया। वहीं डीडीहाट, अस्कोट, सतगढ़ सहित अन्य क्षेत्रों में भी आठूं महोत्सव उत्साह के साथ मनाया गया। कई जगह आठूं पर्व पर मां गौरा और भगवान महेश्वर को विदाई दी गई।