सहारनपुर। बरसात ने एक बार फिर से विकास के दावों को बेनकाब कर दिया। गांवों के रास्ते पानी में तब्दील हो गए, लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। तल्हेडी बुजुर्ग के साखन खुर्द गांव में विकास के दावों का सच तब सामने आया जब अर्थी को कंधे पर लेकर जलभराव के बीच से परिजन श्मशान घाट पहुंचे। आखिरकार, मुश्किलों के बीच अंतिम संस्कार किया गया, लेकिन सवाल यह है कि विकास की इस लचर व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन है। दरअसल, साखन खुर्द गांव में शिवकुमार (55) उर्फ (काला) और कालूराम (62) का बुधवार को निधन हो गया था। दोनों काफी समय से बीमार चल रहे थे। पिछले कुछ दिनों से पड़ रही बारिश के कारण श्मशान घाट के रास्ते पर जलभराव था। परिजन और ग्रामीण पानी के बीच से होते हुए श्मशान घाट पर अर्थी लेकर पहुंचे। हालात यह थे कि श्मशान घाट के पास भी जलभराव की स्थिति थी। ऐसे में जैसे-जैसे कर मुश्किलों के बीच अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीण अशोक त्यागी, भूपेंद्र त्यागी, विशाल त्यागी, निखिल त्यागी, राजन शर्मा, विनोद त्यागी, यशपाल आदि ने बताया कि श्मशान घाट के बराबर में तालाब है। बारिश होने से जिसमें अत्यधिक पानी भर गया और निकासी न होने के कारण पानी श्मशान घाट में रास्ते में भर गया। इस वजह से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि श्मशान घाट के सामने ही एक नाला भी बना हुआ है, जिसमें गांव का पानी आता है, लेकिन सफाई न होने कारण उसका पानी भी सड़कों पर बह रहा है। उन्होंने प्रशासन से समस्याओं का समाधान कराने की मांग की है।