बेटी की शादी के लिए जेवर कैसे बनाएंगे, यह सोच रायबरेली में एक गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के पिता के जेहन में कौंध रही है। जिनकी बेटी और बेटे छोटे हैं और वह मध्यमवर्गीय हैं, वह भी बच्चों की शादियों में आने वाले खर्च के लिए अभी से चिंतित होने लगे हैं। सभी को लगने लगा है कि इन मूल्यवान मेटल के दाम गिरने नहीं हैं। ऐसे में क्या किया जाए कि बच्चों के जब विवाह या अन्य समारोह हों तो जेवर की खरीदारी की जा सके। असल में सोने और चांदी के जेवर आम आदमी की पहुंच से बाहर हो रहे हैं। सहालग का समय नजदीक आ रहा है और लोगों में जेवर की खरीदारी के लिए कोई उत्साह नहीं है। चांदी और सोने के दाम हर किसी को चौंका रहे हैं। हर दिन दोनों जेवरों की कीमत में जबरदस्त उछाल आ रही है। इसका असर सराफा बाजार पर पड़ा है। बाजार से रौनक गायब है और छोटे सराफा व्यापारी दुकान का किराया तक नहीं निकाल पा रहे है। हाल यह है कि कर्मचारियों को वेतन के लिए भी सोचना पड़ रहा है। सबसे खराब हालत उन माला पिरोने वाले कामगारों की है। जिनकी कई दिनों तक बोहनी नहीं होती है। सराफा कारोबारियों का कहना है कि चांदी और सोना के दाम और बढ़ेंगे। किसी भी कीमत दाम बहुत नीचे नहीं गिरेंगे। शादी हो या उत्सव जेवर की मांग हमेशा से रहती है, लेकिन सोने और चांदी की महंगाई ने उत्सवों के उल्लास को कम कर दिया है। सोने और चांदी के दामों पर सराफा बाजार के व्यापारियों की नजर सरकार के आगामी बजट के साथ बीआईएस के निर्णयों पर टिकी हुई है।