मथुरा में कान्हा की नगरी में गणेशोत्सव को लेकर उत्साह चरम पर है। इस बार उत्सव में पर्यावरण संरक्षण की अनूठी तस्वीर देखने को मिल रही है, जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों की जगह कोलकाता की विशेष काली मिट्टी से बनी इको-फ्रेंडली मूर्तियों की भारी मांग है। श्रद्धालुओं के बीच इस बार बप्पा के कई आकर्षक रूप आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, जिनमें प्रसिद्ध रूप लालबाग के राजा और बाल गणेश हैं, वहीं टेडी बैठक, चूहा पर बैठे गणेश और चौकी बैठक वाली मूर्तियों की भी मांग है। पारंपरिक स्वरूप गद्दी पर विराजमान पगड़ी वाले गणेश जी की श्रद्धालु मांग कर रहे है। अंबा खार में मूर्तिकारों के अनुसार पीओपी की मूर्तियां जल को प्रदूषित करती हैं, जबकि कोलकाता से मंगाई गई काली मिट्टी से बनी प्रतिमाएं विसर्जन के मात्र 30 मिनट के भीतर पानी में पूरी तरह घुल जाती हैं। बाजार में इन कलात्मक मूर्तियों की कीमत 100 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक है। लोग हाथों-हाथ इन प्रतिमाओं को अपने घर विराजने के लिए खरीद रहे हैं। खरीदारी करने आईं श्रद्धालु सुनीता शर्मा ने कहा कि हम हर साल बप्पा को घर लाते हैं, लेकिन इस बार हमने तय किया था कि सिर्फ इको-फ्रेंडली मूर्ति ही स्थापित करेंगे।