स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर ग्राम सभा बबुरी में बनाया गया कूड़ा-घर आज अपनी उपयोगिता खो चुका है। ग्रामीणों के घरों और स्थानीय बाजार से निकलने वाला कचरा जहां-तहां फेंका जा रहा है, जबकि कचरा निस्तारण के लिए बना पक्का ढांचा वर्षों से लगभग खाली पड़ा है। नतीजा यह है कि सड़क किनारे, नालियों और खाली प्लॉटों में कूड़े के ढेर लग रहे हैं और ग्रामीणों को दुर्गंध व गंदगी का सामना करना पड़ रहा है। वर्ष 2021-22 में मनरेगा और 15वें वित्त आयोग की निधि से निर्मित इस कूड़ा-घर में छत, चहारदीवारी और गीले, सूखे तथा जैविक कचरे के लिए अलग-अलग कक्ष बनाए गए थे। लेकिन निर्माण के बाद से ही इसके संचालन की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी। सफाई कर्मियों की कमी और कूड़ा उठाने वाले वाहन की अनुपलब्धता के कारण यह योजना धरातल पर सफल नहीं हो पाई। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की ओर से नियमित रूप से कचरा संग्रहण नहीं होता। ऐसे में लोग मजबूरी में सड़क किनारे, नालियों या खाली जगहों पर कूड़ा फेंक देते हैं। गांव से बाहर स्थित कूड़ा-घर तक कचरा पहुंचाने की कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं है। बरसात के दिनों में यही कचरा नालियों में फंसकर जलभराव का कारण बनता है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है।