ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में आयोजित तीन दिवसीय कथक कार्यशाला के दूसरे दिन शनिवार को प्रतिभागियों को कथक की पारंपरिक शैली का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने कथक की तकनीक, भाव, लय और ताल की बारीकियां सीखीं। कार्यशाला का संचालन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक कलाकार एवं पंडित राजेंद्र गंगानी के वरिष्ठ शिष्य मुजफ्फर मुल्ला और विद्यागौरी अडकर ने किया। दोनों प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को कथक नृत्य की पारंपरिक शैली और प्रस्तुति की विभिन्न तकनीकों से अवगत कराया। लालसा एसोसिएशन और आर्टिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में 15 से 20 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। आयोजकों के अनुसार कार्यशाला का उद्देश्य युवा कलाकारों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ना और उनकी प्रतिभा को निखारना है।