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राजस्थान: यूजीसी रोल बैक नहीं हुआ तो 25 अक्टूबर को बड़ा आंदोलन, करणी सेना ने दी जौहर की चेतावनी

Thu, 22 Oct 2026 10:37 AM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के प्रस्तावित नियमों को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। राष्ट्रीय करणी सेना ने यूजीसी के नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर आंदोलन के अगले चरण का ऐलान करते हुए केंद्र सरकार को 24 अक्टूबर तक का समय दिया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव सिंह शेखावत ने चेतावनी दी कि यदि तय समय तक सरकार की ओर से मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 25 अक्टूबर को जयपुर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने शहर में व्यापक प्रदर्शन, जाम और ‘लॉकडाउन’ जैसे कदम उठाने की भी चेतावनी दी है। 24 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम, 25 को बड़े आंदोलन की तैयारी राष्ट्रीय करणी सेना के अध्यक्ष शिव सिंह शेखावत ने कहा कि संगठन यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को वापस लेने की मांग कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 24 अक्टूबर तक सरकार इस मामले में कोई सकारात्मक पहल नहीं करती है तो 25 अक्टूबर को आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जाएगा। उनके अनुसार, उस दिन होने वाली सभा में आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि आंदोलन को राजस्थान से बाहर दूसरे राज्यों तक भी विस्तार दिया जा सकता है।
शेखावत ने दावा किया कि राजस्थान के अलावा हरियाणा, मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों से भी समाज के लोग जयपुर पहुंच सकते हैं। कई स्थानों से लोगों की टीमें आंदोलन में शामिल होने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न वर्गों के लोग एकजुट होकर यूजीसी के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगेंगे। महिला शक्ति पहले से अनशन पर, बच्चों के भविष्य से जुड़ा बताया मुद्दा शेखावत ने कहा कि यूजीसी के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय करणी सेना की महिला शक्ति पहले से अनशन पर बैठी है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार नियमों को वापस लेने की मांग पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उनके मुताबिक, यह केवल संगठन का विषय नहीं है, बल्कि समाज के बच्चों और उनके भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। इसी वजह से समाज की महिलाएं भी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। शेखावत ने सरकार से समय रहते समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत करने और उनकी आपत्तियों पर विचार करने की अपील की। जौहर का ऐतिहासिक संदर्भ देकर दी चेतावनी राष्ट्रीय करणी सेना अध्यक्ष ने अपने बयान में जौहर जैसे ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए सरकार को गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जौहर कोई सामान्य शब्द नहीं है और राजपूत इतिहास में इसका विशेष तथा गंभीर संदर्भ रहा है। शेखावत के अनुसार, यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो आंदोलनकारी महिलाओं की ओर से जौहर की चेतावनी दी गई है। उन्होंने कहा कि संगठन ऐसी स्थिति नहीं चाहता, लेकिन लगातार मांगों की अनदेखी होने से समाज में आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन में जौहर कुंड को लेकर चर्चा की जा रही है। शेखावत ने दावा किया कि देश के विभिन्न हिस्सों से क्षत्राणियां और समाज की महिलाएं आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि समय रहते बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए, ताकि ऐसी स्थिति पैदा न हो। स्वर्ण समाज के राजनीतिक नेताओं की भूमिका पर उठाए सवाल शेखावत ने स्वर्ण समाज के राजनीतिक नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कई नेता व्यक्तिगत रूप से उनके संपर्क में हैं और आंदोलन को समर्थन देने की बात कहते हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के दबाव के कारण सार्वजनिक रूप से सामने आने से बच रहे हैं। उन्होंने ऐसे नेताओं से समाज की महिलाओं के साथ खड़े होने और यूजीसी के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की अपील की। शेखावत ने राजनीतिक दलों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि समाज लंबे समय से अपनी मांग उठा रहा है, लेकिन राजनीतिक दल इस विषय को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यूजीसी का मुद्दा किसी राजनीतिक दल से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि समाज के अधिकारों और बच्चों के भविष्य से संबंधित विषय है। उनके मुताबिक, 25 अक्टूबर को होने वाली सभा में आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी और जरूरत पड़ने पर इसे राजस्थान से बाहर भी ले जाया जा सकता है। चाणक्य सेना ने भी किया समर्थन, अजय कुमार ने सरकार से की विचार की अपील यूजीसी के मुद्दे पर चाणक्य सेना ने भी राष्ट्रीय करणी सेना की मांगों का समर्थन किया है। चाणक्य सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि सवर्ण समाज केंद्र सरकार का बड़ा वोट बैंक है और सरकार को यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को लेकर समाज की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अजय कुमार ने दशहरे पर शस्त्र पूजा का उल्लेख करते हुए भगवान परशुराम के अन्याय के खिलाफ संघर्ष के इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो परशुराम के इतिहास की यादें फिर ताजा हो सकती हैं। फिलहाल राष्ट्रीय करणी सेना ने सरकार को 24 अक्टूबर तक का समय दिया है। संगठन ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने की स्थिति में 25 अक्टूबर को जयपुर में बड़े आंदोलन, व्यापक प्रदर्शन और शहर में जाम व ‘लॉकडाउन’ जैसे कदम उठाने की चेतावनी दी है।

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