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जिंदा जीव बेसहारा आश्रम ने साहिबा खातून को 7 महीने बाद परिवार से मिलवाया

समाज सेवा में अपनी अलग पहचान बना चुके जिंदा जीव बेसहारा आश्रम ने एक और सराहनीय कार्य किया है। आश्रम के संचालक अशोक सचदेवा और उनकी पत्नी पिंकी सचदेवा के प्रयासों से बिहार निवासी साहिबा खातून सात महीने बाद अपने परिवार से मिल सकीं। जानकारी के अनुसार, करीब सात महीने पहले साहिबा खातून जवाहर मार्केट में खराब हालत में सड़कों पर घूम रही थीं। इसकी सूचना जवाहर मार्केट व्यापार मंडल के अध्यक्ष एवं मौजूदा पार्षद राजेश आंगरा ने आश्रम के संचालक अशोक सचदेवा को दी। सूचना मिलते ही अशोक सचदेवा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और साहिबा खातून को आश्रम में लाकर उनकी देखभाल व उपचार करवाया। साथ ही, उनके परिवार का पता लगाने के लिए पुलिस और सामाजिक सुरक्षा विभाग के सखी सेंटर, रूपनगर को भी सूचना दी गई। देखभाल और उपचार के बाद साहिबा की हालत में सुधार हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने घर का पता और फोन नंबर उपलब्ध करवाया। अशोक सचदेवा ने दिए गए नंबर पर संपर्क किया और सखी सेंटर को भी जानकारी दी। आखिरकार, साहिबा खातून के भाई मुहम्मद अलफात कुरैशी अपने परिवार के साथ बिहार से उन्हें लेने पहुंचे। सामाजिक सुरक्षा विभाग के सखी सेंटर, रूपनगर की अधिकारी कमलजीत कौर की मौजूदगी में आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद साहिबा को उनके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। साहिबा के भाई मुहम्मद अलफात कुरैशी ने बताया कि उनका परिवार बिहार के सासाराम में रहता है। उनकी बहन शादीशुदा हैं और मानसिक परेशानी से जूझ रही थीं। वह उन्हें उपचार के लिए पटना ले जा रहे थे, लेकिन आरा रेलवे स्टेशन से वह लापता हो गई थीं। परिवार ने उन्हें काफी तलाश किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अब आश्रम से सूचना मिलने पर वह उन्हें लेने पहुंचे हैं। आश्रम के संचालक अशोक सचदेवा ने बताया कि उनके आश्रम में करीब 120 दिव्यांग, बेसहारा और मानसिक रूप से परेशान लोगों की देखभाल की जाती है। वह अपनी पत्नी के साथ दिन-रात इनकी सेवा में जुटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि साहिबा खातून का स्वस्थ होकर अपने परिवार के पास लौटना उनके लिए बेहद खुशी की बात है।

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