परमवीर चक्र विजेता शहीद सूबेदार जोगिंदर सिंह का शहीदी दिवस आज मोगा के मिनी सचिवालय में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस मौके पर मोगा जिला प्रशासन और 197 आरटी रेजिमेंट की ओर से शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समारोह से पहले 197 आरटी रेजिमेंट की ओर से अरदास भी की गई। शहीद सूबेदार जोगिंदर सिंह मोगा जिले के गांव महला कलां के रहने वाले थे। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान असाधारण वीरता का परिचय देते हुए देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। 23 अक्टूबर 1962 को बुमला दर्रे के पास चीनी सेना के हमलों का सामना करते हुए उन्होंने अपने साथियों के साथ दुश्मन को कड़ी टक्कर दी। उनकी बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान के सम्मान में उन्हें देश के सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। जानकारी के अनुसार, 1962 के युद्ध में बुमला दर्रे पर 1 सिख रेजिमेंट की प्लाटून पर चीनी सेना ने तीन बार हमला किया था। सूबेदार जोगिंदर सिंह ने अपने लगभग 20 जवानों के साथ पहले दो हमलों को नाकाम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तीसरे हमले के दौरान जब गोलियां समाप्त हो गईं, तो उन्होंने 'जो बोले सो निहाल' का जयकारा लगाते हुए संगीनों से दुश्मन का मुकाबला किया। इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए और देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। समारोह में शहीद सूबेदार जोगिंदर सिंह की बेटी कुलवंत कौर विशेष रूप से मोगा पहुंचीं। उन्होंने अपने पिता की प्रतिमा अथवा स्मृति स्थल पर फूल अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि मोगा जिला प्रशासन की ओर से हर साल उनके पिता को याद किया जाता है और उनके बलिदान को सम्मान दिया जाता है। इस अवसर पर एडीसी कुलप्रीत सिंह ने कहा कि आज हम जिस आजादी और सुरक्षा के साथ खुले में घूम रहे हैं, उसके पीछे देश के वीर जवानों का बहुत बड़ा योगदान है। हमें ऐसे शहीदों को हमेशा याद रखना चाहिए और उनके बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए। श्रद्धांजलि समारोह में जिला प्रशासन के अधिकारियों के अलावा पूर्व सैनिक और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे। सभी ने शहीद सूबेदार जोगिंदर सिंह की वीरता, देशभक्ति और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।