विज्ञान की शिक्षा को अधिक रोचक, व्यावहारिक और विद्यार्थियों तक सुलभ बनाने के उद्देश्य से पुष्पा गुजराल साइंस सिटी द्वारा पंजाब के जिला शिक्षा अधिकारियों, शिक्षण संस्थानों के निदेशकों और स्कूल प्रमुखों की एक विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य शिक्षण संस्थानों और साइंस सिटी के बीच सहयोग को मजबूत करना तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना था। इस दौरान शिक्षा विशेषज्ञों को साइंस सिटी की विभिन्न प्रदर्शनियों और दीर्घाओं का भ्रमण करवाया गया। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से वैज्ञानिक सिद्धांतों को व्यावहारिक प्रयोगों द्वारा सरल ढंग से समझाया गया। मेहमानों ने बड़ी स्क्रीन पर फिल्म ‘मिशन मून’ भी देखी, जिसमें भारत के चंद्र मिशन को सफल बनाने के दौरान सामने आई चुनौतियों को दर्शाया गया। इसके अलावा, विशेषज्ञों को साइंस सिटी में हाल ही में स्थापित नए कैप्सूल सिम्युलेटर का अनुभव भी करवाया गया। बैठक के दौरान शिक्षा विशेषज्ञों ने विज्ञान की पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए साइंस सिटी द्वारा आयोजित विभिन्न सामाजिक एवं वैज्ञानिक दिवसों और शैक्षणिक कार्यक्रमों की सराहना की। इस अवसर पर साइंस सिटी के निदेशक डॉ. राजेश ग्रोवर ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षण संस्थानों और साइंस सिटी के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने शिक्षा विशेषज्ञों से ऐसे विषयों और क्षेत्रों की पहचान करने की अपील की, जिनके माध्यम से साइंस सिटी को स्कूली विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम का प्रभावी हिस्सा बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में सुधार होगा और विज्ञान की शिक्षा अधिक से अधिक बच्चों तक पहुँच सकेगी। डॉ. ग्रोवर ने कहा कि साइंस सिटी की दीर्घाएँ, प्रदर्शनियाँ और विभिन्न शो विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को सरल और रोचक तरीके से समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ती है और वे नई खोजों तथा रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने बताया कि साइंस सिटी विद्यार्थियों की वैज्ञानिक समझ और कौशल को विकसित करने के लिए स्कूलों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में पूरे वर्ष विज्ञान शिक्षा से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिल सके।