पंजाब में खेतों को पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। एक तरफ सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि किसानों को खेतों के लिए 8 घंटे बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है और हर गांव तक नहरी पानी पहुंचाया गया है, जबकि दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। मोगा जिले के गांव सिंघावाला, तारेवाला, नाहलखोटे सहित आसपास के कई गांवों के किसानों का कहना है कि उन्हें खेतों में 8 घंटे तो दूर, एक घंटे भी नियमित बिजली नहीं मिल रही। इन गांवों में नहरी पानी की भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है। बिजली और पानी की कमी के कारण किसानों की फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं और धान की फसल भी खराब हो रही है। गांव सिंघावाला के किसान केबल सिंह ने बताया कि उनके पास 20 एकड़ में धान की फसल है, जो बिजली न मिलने के कारण खराब हो रही है। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में धान की बिजाई पर करीब 25 हजार रुपये खर्च हुए हैं, जबकि 80 हजार रुपये प्रति एकड़ ठेका भी देना है। इस समय फसल को पानी की सख्त जरूरत है, लेकिन बिजली नहीं मिलने के कारण खेतों में सिंचाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में उन्हें चिंता है कि अगर फसल खराब हुई तो उनका पूरा खर्च भी नहीं निकल पाएगा और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। बिजली की मांग को लेकर किसानों ने बाघापुराना पावरग्रेड के पास मोगा बाघापुराना रोड जाम करके रोष प्रदर्शन किया। किसानों ने 8 घंटे बिजली की मांग को लेकर बिजली विभाग के अधिकारी को मांग पत्र देकर धरना समाप्त किया लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा।