फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Video: बीबीएयू में जैन प्राकृत परंपरा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, भाषा के विकास पर हुई चर्चा

बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में ‘जैन प्राकृत परंपरा: भाषा विकास एवं संवर्धन’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने जैन दर्शन, प्राकृत भाषा की परंपरा और उसके व्याकरण के विकास पर विचार साझा किए। साथ ही भारतीय भाषाओं के इतिहास और जैन साहित्य के योगदान पर भी चर्चा हुई। संगोष्ठी में वक्ता अभय कुमार जैन ने प्राकृत भाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जैन साहित्य में प्राकृत भाषा का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। आचार्य कुंदकुंद के ग्रंथों और अष्टपाहुड़ जैसी रचनाओं के माध्यम से जैन दर्शन के विचारों के प्रसार तथा प्राकृत भाषा के संवर्धन में योगदान मिला। अभय कुमार जैन ने संस्कृत भाषा को एक प्रामाणिक भारतीय भाषा बताते हुए उसके व्यवस्थित व्याकरण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं और दर्शन की परंपरा को समझने के लिए उनके ऐतिहासिक विकास का अध्ययन जरूरी है। उन्होंने राहुल सांकृत्यायन के संदर्भ का उल्लेख करते हुए जैन दर्शन को समझने में आचार्य समंतभद्र और उमास्वामी के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। वक्ता ने सौरसेनी प्राकृत और हिंदी भाषा के उद्गम एवं विकास पर भी प्रकाश डाला। इस दौरान प्राकृत भाषा की परंपरा, जैन साहित्य और भारतीय भाषाओं के आपसी संबंधों पर विचार-विमर्श किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य जैन प्राकृत साहित्य और भाषा की समृद्ध परंपरा पर अकादमिक चर्चा को आगे बढ़ाना तथा इसके अध्ययन और संवर्धन को प्रोत्साहित करना रहा।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें