राजधानी लखनऊ के उतरेठिया में अप्रैल 2021 में खुले आशी क्लीनिक में भर्ती 25 वर्षीय युवक को कोरोना बताकर 10 दिन में 14 लाख रुपये ऐंठे गए। इसके बाद युवक की मौत हो गई। इस मामले में अस्पताल के द्वारा की गई लापरवाही की शिकायत परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग में की। अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के द्वारा कमेटी गठित की गई। इसकी जांच रिपोर्ट दो वर्ष बाद आई है। इसमें अस्पताल को दोषी पाया गया। इसके बाद परिजन अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे तब तक अस्पताल संचालक अस्पताल को बंद करके मौके से फरार हो गया। स्वास्थ्य विभाग में कोई कार्रवाई नहीं की। अब तीन वर्ष बाद शुक्रवार को दोषी क्लीनिक संचालक के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया। सेना से रिटायर बृजेश त्रिपाठी इन्हौना जनपद अमेठी निवासी 2021 में गीता पल्ली बंगला बाजार में रहने के दौरान अपने बेटे कामाख्या नारायण त्रिपाठी जो की 25 वर्ष का था। सर्दी जुकाम होने पर बेटे को आशी क्लीनिक में दिखाया, जहां अस्पताल ने कोरोना बताते हुए उसे भर्ती कर लिया। परिजनों को तरह-तरह की जांच और दवाओं के नाम पर 10 दिनों तक इलाज करते रहे और घर वालों से 14 लाख रुपए ऐंठ लिया। यही नहीं इसके बाद युवक की मौत भी हो गई। परिजनों ने घटना में अस्पताल पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया, पिता बृजेंद्र त्रिपाठी ने जगह जगह शिकायत की, उनकी शिकायत पर अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा की तरफ से एक कमेटी का गठन किया गया। कमेटी की रिपोर्ट 2023 में आई जिसमें अस्पताल संचालक को दोषी मानते हुए अस्पताल के द्वारा लापरवाही किए जाने की बात को स्वीकार किया गया। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल संचालक अस्पताल को बंद करके मौके से फरार हो क्या इधर युवक के परिजन स्वास्थ्य विभाग से कार्रवाई की मांग कर रहे थे पर विभाग के द्वारा कुछ नहीं किया गया इसके बाद मृतक लड़के के पिता ने पुलिस के बड़े अधिकारियों से शिकायत की, तब 21 अगस्त 2026 शुक्रवार को उनका मुकदमा दर्ज किया गया। इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल की संचालक डॉक्टर सूर्य प्रकाश शुक्ला डॉक्टर मनीषा शुक्ला के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है पुलिस ने जांच की कार्रवाई शुरू कर दी।