जिस लखनऊ ने लंबा नवाबी दौर देखा है, जिसकी गलियों में मीठी जुबान और तहजीब की खुशबू कायम है, वहां के युवा अब उर्दू सीखने से भी परहेज कर रहे हैं। एक समय था जब लखनऊ विश्वविद्यालय में उर्दू विषय में प्रवेश के लिए मारामारी होती थी, आज वहां विद्यार्थी खोजे नहीं मिल रहे हैं। लविवि में इस साल एमए उर्दू की 120 सीटों के सापेक्ष केवल 45 छात्र ही मिल सके हैं। लविवि में उर्दू विभाग के अध्यक्ष सीनियर प्रोफेसर डॉ. अब्बास रजा नैय्यर ने बताया कि एक जमाने में एमए उर्दू में प्रवेश लेने वालों की इतनी ज्यादा संख्या होती थी कि सीटों की संख्या बढ़ानी पड़ी लेकिन पिछले 10-12 वर्षों के दौरान शहर में कई विश्वविद्यालय व कॉलेजों में कोर्स शुरू हो जाने की वजह से लखनऊ विवि में छात्रों की संख्या घटती चली गई। इस दौरान यहां हर साल सीटें खाली रह जाती हैं। उन्होंने बताया कि निर्धारित तिथि तक उनके पास 45 विद्यार्थियों के आवेदन प्राप्त हो चुके थे। विवि की ओर से 31 अगस्त तक सीधे प्रवेश दिए जाने की घोषणा के बाद करीब 20 आवेदन बढ़े हैं, जिससे यह संख्या 65 हो सकती है। उन्होंने बताया कि शिया पीजी कॉलेज के अलावा ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि में भी कोर्स संचालित होने लगे, जिसकी वजह से छात्रों की संख्या बंट गई है। इसके अलावा मौलाना आजाद ओपन यूनिवर्सिटी में तो स्कॉलरशिप भी मिलती है, जिससे छात्रों का रुझान उस तरफ भी हुआ है। मालूम हो कि लविवि की ओर से 27 अगस्त को सूचना जारी की गई थी कि ऐसे पीजी पाठ्यक्रमों में सीधे प्रवेश दिया जाएगा, जिनमें सीटें रिक्त रह गई हैं। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थियों को सत्र 2026-27 में परास्नातक पाठ्यक्रम के लिए किए गए आवेदन की प्रति, सीधे प्रवेश के लिए स्वहस्ताक्षरित प्रार्थना पत्र और आधार कार्ड की स्वहस्ताक्षरित प्रति जमा करनी होगी। इसके लिए भी अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित की गई थी। हालांकि पीजी में कई कोर्स अब भी ऐसे हैं जिनमें सीटें खाली रह जाने की आशंका है। पीजी के 43 पाठ्यक्रमों में सीटें खाली रह गई हैं। इन सीटों के लिए सीधे आवेदन मांगे गए हैं और मेरिट के आधार पर प्रवेश लिया जाएगा। खाली रह गए कोर्सेंज में एमए एआईएच एंड आर्कियोलॉजी, एमए आचार्य, एमए अरब कल्चर, एमए अरबी, एमए कंपोजिट हिस्ट्री, एमए डिफेंस स्टडीज, मास्टर्स ऑफ पॉपुलेशन स्टडीज, एमए फ्रेंच, एमए संस्कृत, एमए उर्दू, एमए फिलॉसफी, एमए होम साइंस, एमए लिंग्विस्टिक्स, एमए पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नेंस और एमए ज्योतिष विज्ञान शामिल हैं। विज्ञान वर्ग में एमएससी एनवायरमेंटल साइंसेज, कंप्यूटर साइंस, डाटा साइंस एंड एनालिटिक्स, एआई एंड मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी एंड साइबर फॉरेंसिक, रिन्यूएबल एनर्जी, मॉलिक्यूलर एंड ह्यूमन जेनेटिक्स, फूड प्रोसेसिंग एंड टेक्नोलॉजी और मैथमैटिक्स जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा एमबीए फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट, मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ, एमए एजुकेशन, एमकॉम एप्लाइड इकोनॉमिक्स और एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में भी सीटें खाली रह गई हैं। हालांकि एमए उर्दू के बाद रोजगार के कई अवसर हैं- स्कूलों में उर्दू शिक्षक के साथ यूजीसी नेट/पीएचडी के बाद कॉलेज व विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का अवसर। 2- सरकारी विभागों, न्यायालयों, दूतावासों और निजी संस्थानों में उर्दू अनुवादक के रूप में काम। 3- उर्दू समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और डिजिटल मीडिया संस्थानों में रिपोर्टर, संपादक और प्रूफरीडर की भूमिका। 4- समाचार उद्घोषक, स्क्रिप्ट राइटर और कंटेंट राइटर के तौर पर अवसर। 5- दुभाषिया के रूप में काम कर सकते हैं। विभिन्न संस्थानों और बैठकों में उर्दू-हिंदी/अंग्रेजी भाषा के इंटरप्रेटर के रूप में काम। 6- ऑनलाइन कंटेंट राइटिंग, अनुवाद और संपादन के जरिए भी आय का विकल्प।