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धीरेंद्र शास्त्री ने दिया बंगाल में मांसाहार पर बयान मचा सियासी बवाल!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Tue, 08 Sep 2026 02:54 AM IST

बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा और नवरात्रि के दौरान दुर्गा प्रतिमाओं के आसपास मांसाहारी भोजन नहीं बेचने की अपील की है। हावड़ा के लिलुआ में आयोजित तीन दिवसीय हनुमंत कथा के दौरान उन्होंने बंगाल के हिंदुओं से नवरात्रि को पूरी श्रद्धा और धार्मिक भावना के साथ मनाने का आग्रह किया। शास्त्री ने कहा कि चाहे कोई व्यक्ति दुर्गा पूजा के लिए प्रतिमा स्थापित करे या न करे, दुर्गा प्रतिमाओं के आसपास नॉन-वेज भोजन की बिक्री नहीं होनी चाहिए। उनकी इस अपील के बाद पश्चिम बंगाल में धार्मिक परंपराओं, खान-पान और दुर्गा पूजा की सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर बहस शुरू हो गई है।

6 सितंबर को हनुमंत कथा के समापन दिवस पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि दुर्गा प्रतिमाओं के पास मांसाहारी भोजन नहीं बेचा जाना चाहिए। उन्होंने बंगाल के हिंदुओं से अपील करते हुए कहा कि नवरात्रि के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाए, चाहे वे दुर्गा पूजा करें, प्रतिमा स्थापित करें या ऐसा कुछ न करें। इसी दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल को 'लव जिहाद' से मुक्त करने का संकल्प लेने की भी बात कही। शास्त्री ने महिलाओं के सम्मान पर जोर देते हुए कहा कि जिस तरह देवी की प्रतिमा में मां के दर्शन किए जाते हैं, उसी तरह हर महिला में भी मां का स्वरूप देखना चाहिए।

शास्त्री की यह अपील ऐसे समय सामने आई है, जब पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से पहले धार्मिक परंपराओं और खान-पान को लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक बहस तेज हो रही है। उनकी टिप्पणी से कुछ दिन पहले विश्व हिंदू परिषद यानी VHP की ओर से भी पश्चिम बंगाल के दुर्गा पूजा आयोजकों से पूजा पंडालों के आसपास मांसाहारी भोजन नहीं रखने की सलाह दी गई थी। वीएचपी ने अपनी अपील को दुर्गा पूजा और त्योहार की धार्मिक पवित्रता बनाए रखने से जोड़कर पेश किया था। इसके बाद अब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से भी इसी तरह की अपील किए जाने से इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो गई है।

शास्त्री के बयान पर अलग-अलग वर्गों से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कुछ लोगों ने उनकी अपील पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बंगाल की दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का भी हिस्सा है। वहीं, कुछ लोगों ने शास्त्री के बयान का समर्थन किया और इसे धार्मिक भावनाओं तथा पूजा स्थलों की मर्यादा से जोड़कर देखा। सोशल मीडिया पर भी उनके बयान को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने बयान का समर्थन किया, जबकि अन्य ने इसका मजाक उड़ाते हुए सवाल उठाए। फिलहाल, दुर्गा पूजा से पहले सामने आए इस बयान ने पश्चिम बंगाल में धार्मिक आस्था, खान-पान की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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