दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को एक चार मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई... हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई... मलबे में 50 से 60 छात्रों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है... दमकल की आठ गाड़ियां और कई बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं... पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और मलबे में जिंदगी तलाशने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है... चश्मदीदों के मुताबिक, इमारत में रेनोवेशन और बेसमेंट का काम चल रहा था और नीचे के पिलर कमजोर थे...
ये तस्वीरें दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन की हैं... जहां रविवार को एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर जमींदोज हो गई... कुछ ही पलों में पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई...
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली अग्निशमन सेवा की आठ गाड़ियां मौके पर पहुंचीं... पुलिस की टीमें भी घटनास्थल पर पहुंचीं और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई... इसके बाद आपातकालीन कर्मियों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया...
हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मलबे के नीचे 50 से 60 छात्रों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है... हालांकि, फंसे लोगों, घायलों या बचाए गए लोगों की संख्या को लेकर अभी कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है...
दमकल विभाग के मुताबिक, बचावकर्मियों ने मलबे से कुछ लोगों को बाहर निकाला और उन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भेजा... रेस्क्यू टीम लगातार मलबा हटाकर यह पता लगाने में जुटी है कि अंदर कोई और व्यक्ति तो फंसा हुआ नहीं है...
हादसे के बाद स्थानीय लोग भी मदद के लिए आगे आए... प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरने के तुरंत बाद लोग मौके पर पहुंचे और अपने हाथों और उपलब्ध उपकरणों की मदद से मलबे में दबे लोगों को तलाशने लगे...
घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों में मलबे के नीचे एक पैर फंसा हुआ दिखाई दिया... दमकलकर्मी उस व्यक्ति तक पहुंचने के लिए बेहद सावधानी से मलबा हटाते नजर आए...
चश्मदीदों का कहना है कि मलबे के अंदर से अभी भी आवाजें सुनाई दे रही हैं... ऐसे में हर मिनट रेस्क्यू टीम के लिए बेहद अहम है...
एक दुकानदार ने बताया कि हादसे से ठीक पहले तक सब कुछ सामान्य था... चश्मदीद के मुताबिक, उसकी दुकान घटनास्थल के पास ही है... अचानक इतनी तेज गड़गड़ाहट हुई, जैसे भूकंप आया हो... लोग घबराकर दुकान से बाहर भागे और बाहर निकलते ही धूल और धुएं का गुबार दिखाई दिया...
चश्मदीद ने दावा किया कि इमारत में रेनोवेशन का काम चल रहा था... बेसमेंट बनाया जा रहा था और ग्राउंड फ्लोर पर किराए के लिए कमरे तैयार किए जा रहे थे...
चश्मदीद का दावा है कि इमारत के ऊपरी हिस्से को मजबूत किया गया था, लेकिन नीचे के पिलर कमजोर थे... रेनोवेशन के दौरान मजदूर नीचे काम कर रहे थे और इसी दौरान इमारत ढह गई...
हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है... प्रत्यक्षदर्शियों के दावों और घटनास्थल की स्थिति की जांच के बाद ही हादसे की असली वजह सामने आएगी...
इमारत हॉस्टल थी या सामान्य मकान, इसको लेकर भी स्थानीय लोगों के बयान अलग-अलग हैं... कुछ लोगों ने इसे घर बताया, जबकि कुछ के मुताबिक यहां छात्रों का हॉस्टल चल रहा था...
फिलहाल पुलिस और दमकल विभाग का पूरा फोकस रेस्क्यू ऑपरेशन पर है... मलबे को सावधानी से हटाया जा रहा है ताकि अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके...
पुलिस लगातार स्थानीय लोगों और तमाशबीनों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील कर रही है... ताकि बचाव दल को काम करने में परेशानी न हो और किसी दूसरे हादसे का खतरा न बढ़े...
घटना के कारणों को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है...
सत्य निकेतन का ये हादसा कई सवाल छोड़ गया है... अगर चश्मदीदों के दावे सही हैं तो रेनोवेशन और बेसमेंट निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की आशंका की जांच जरूरी होगी...
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचना है... रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और हर गुजरते मिनट के साथ उम्मीद और चिंता दोनों बढ़ती जा रही हैं... अब इंतजार है उन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का, जिनकी जिंदगी मलबे के नीचे अटकी हुई है...