भारतीय परंपराओं में करवाचौथ का पर्व वैवाहिक जीवन की पवित्रता और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। करवाचौथ व्रत सुहागिन महिलाओं की ओर से अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। पर्व का धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी गहरा महत्व है। इस बार भी करवाचौथ को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। सजने-संवरने, पूजा सामग्री और साज-सज्जा के सामान की खरीदारी के लिए महिलाएं बाजारों की ओर उमड़ीं। हालांकि ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े मॉलों की बढ़ती मौजूदगी से स्थानीय दुकानदारों के कारोबार पर असर साफ दिखाई दे रहा है। फिर भी, पारंपरिक बाजारों में इस शुभ अवसर पर रौनक और चहल-पहल ने त्योहार की आत्मा को जीवंत बनाए रखा।