उपतहसील जोल क्षेत्र में पिछले तीन-चार दिनों से खिल रही धूप के बाद आलू उत्पादक किसान खेतों में सक्रिय हो गए हैं। मौसम साफ होने से किसानों को फसल की देखभाल करने का अवसर मिला है। कहीं यूरिया खाद का छिड़काव किया जा रहा है तो कहीं खाद डालने के बाद सिंचाई की जा रही है। किसान मिट्टी में जरूरी नमी बनाए रखने और फसल की बढ़वार बेहतर करने पर ध्यान दे रहे हैं। किसानों को उम्मीद है कि मौसम अनुकूल रहा और फसल को समय पर खाद-पानी मिलता रहा तो इस बार पैदावार अच्छी हो सकती है। इससे खेती पर किए गए खर्च की भरपाई करने और आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। रविवार को क्षेत्र के कई आलू उत्पादक किसान खेतों में काम करते नजर आए। किसान पहले फसल की स्थिति का जायजा ले रहे हैं और फिर जरूरत के अनुसार खाद डालने तथा सिंचाई करने में जुटे हैं। सिंचाई के बाद मिट्टी में नमी बनाए रखने से फसल के विकास में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस बार उत्पादन कितना होगा, यह आने वाले दिनों के मौसम, पौधों की सेहत और आलू के कंदों के विकास पर निर्भर करेगा। किसानों की निगाहें अब फसल की बढ़वार और संभावित पैदावार पर टिकी हैं। क्षेत्र के किसान गुरमेल सिंह ने बताया कि आलू की खेती में शुरुआत से ही काफी मेहनत करनी पड़ती है। बीज, खाद, दवाइयों, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च होता है। ऐसे में फसल की सही समय पर देखभाल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मौसम साफ होने के बाद किसानों को खेतों में काम करने का मौका मिला है। किसान फसल की जरूरत के अनुसार खाद डाल रहे हैं और सिंचाई कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि पौधों की अच्छी वृद्धि के साथ कंदों का विकास भी बेहतर होगा और उपज से उचित आमदनी मिल सकेगी। किसान बलवान सिंह के अनुसार आलू की खेती में सही समय पर सिंचाई करना महत्वपूर्ण है। मिट्टी में पर्याप्त नमी रहने से पौधों की वृद्धि में मदद मिलती है, जबकि नमी की कमी से फसल प्रभावित हो सकती है। उन्होंने बताया कि किसान मौसम पर नजर रखते हुए खेतों में काम कर रहे हैं। खेती की लागत लगातार बढ़ने के कारण अच्छी पैदावार किसानों के लिए बेहद अहम है। यदि फसल की गुणवत्ता अच्छी रही और बाजार में उचित दाम मिले तो किसानों को आर्थिक लाभ हो सकता है। कृषि प्रसार अधिकारी चंदन कुमार शर्मा ने बताया कि आलू की फसल में खाद और सिंचाई का प्रबंधन मिट्टी की स्थिति, पौधों की अवस्था और मौसम को ध्यान में रखकर करना चाहिए। यूरिया का इस्तेमाल कृषि विभाग की अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जरूरत से अधिक नाइट्रोजन देने से पौधों की पत्तियों की वृद्धि बढ़ सकती है, लेकिन इसका कंदों के विकास और फसल की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है। किसानों को सिंचाई के दौरान खेतों में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। अधिक नमी से कंदों के सड़ने और रोग लगने का खतरा बढ़ सकता है। खेतों की नियमित निगरानी करना भी जरूरी है। पौधों में रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग से सलाह लेनी चाहिए। मौसम और बाजार पर टिकी किसानों की निगाहें जोल क्षेत्र में आलू की फसल को लेकर किसानों की उम्मीदें अब मौसम, उत्पादन और बाजार भाव पर टिकी हैं। किसान चाहते हैं कि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल बना रहे और फसल का विकास सही ढंग से हो। संतुलित खाद प्रबंधन, जरूरत के अनुसार सिंचाई और समय पर देखभाल से फसल की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। अब किसानों को अच्छी पैदावार के साथ उपज का उचित मूल्य मिलने का इंतजार है।