पठानकोट के रहने वाले युवा तनिश कुमार ने नवरात्रि के पावन अवसर पर धार्मिक स्थलों की पैदल यात्रा की शुरुआत की। तनिश अपने इस निर्णय को बेहद प्रेरणादायक बताते हैं। उनका कहना है कि यह यात्रा उन्होंने किसी योजना के तहत नहीं, बल्कि अपने मन की पुकार पर शुरू की। उन्होंने कहा कि बस दिल में यही विचार आया कि मंदिरों की यात्रा करनी है और उसी क्षण उन्होंने अपने कदम पूजा और आस्था के इस मार्ग पर बढ़ा दिए। तनिश ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह सफर केवल पैरों से तय नहीं हुआ, बल्कि श्रद्धा से भरा हुआ एक आध्यात्मिक अभियान बन गया। उन्होंने रास्ते में आने वाली कठिनाइयों और आत्मिक संतोष का विशेष उल्लेख किया। तनिश ने कहा कि पैदल चलते हुए हर कदम पर उन्होंने अपने भीतर की शांति को महसूस किया, और यह यात्रा उनके जीवन का अविस्मरणीय अध्याय बन गई। उनकी यह यात्रा धार्मिक और आत्मिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण रही। तनिश ने बताया कि इस यात्रा के दौरान उन्होंने कई धार्मिक स्थलों के दर्शन किए और स्थानीय लोगों के सहयोग से आगे बढ़ते गए। उन्होंने कहा कि भक्ति की राह पर चलने के लिए किसी साधन की जरूरत नहीं, बस सच्चे मन की भावना ही सबसे बड़ी शक्ति होती है। तनिश कुमार की यह पहल युवाओं के लिए एक संदेश है कि अगर मन में दृढ़ इच्छा हो तो हर यात्रा आसान हो जाती है। उनका यह कदम यह दर्शाता है कि आधुनिक युग में भी युवाओं में धार्मिक भावना और आध्यात्मिक जुड़ाव गहराई से विद्यमान है।