आस्था जब संकल्प बन जाए और समर्पण उसकी नींव हो तो असंभव भी संभव प्रतीत होता है। ऐसी ही एक मिसाल बन रही है मथुरा (उत्तर प्रदेश) से निकली श्रद्धालुओं की एक विशेष पैदल यात्रा, जो बुधवार को हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के बड़ूही पहुंची। यह यात्रा 4 मई को ज्वाला प्रसाद भगत और डॉ. महावीर के संयोजन और मार्गदर्शन में आरंभ हुई थी। यात्रा का उद्देश्य विभिन्न प्रमुख शक्तिपीठों के दर्शन कर धार्मिक आस्था को जागृत और मजबूत करना है। यह अध्यात्मिक यात्रा मथुरा से शुरू होकर उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठों ज्वालाजी, चिंतपूर्णी, कांगड़ा देवी, और मां नयना देवी के दर्शन करती हुई हरिद्वार होते हुए 30 मई को फिर मथुरा लौटेगी। कुल मिलाकर यात्रा लगभग 1,200 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।यात्रा में 40 श्रद्धालु भाग ले रहे हैं, जिनकी आस्था, अनुशासन और ऊर्जा प्रेरणादायक है। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह पहली बार है जब इस पैमाने पर ऐसी यात्रा आयोजित की गई है। अधिकांश श्रद्धालु मथुरा और आसपास के क्षेत्रों से हैं, जो भक्ति की भावना से एकजुट होकर इस महान यज्ञ का हिस्सा बने हैं। श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह 4:00 बजे उठकर मां की आरती करते हैं और फिर यात्रा आरंभ करते हैं। दिनभर की पदयात्रा के बाद शाम 6:00 बजे विश्राम किया जाता है। हर दिन औसतन 40 किलोमीटर की दूरी तय की जाती है, यात्रा के दौरान रास्ते में लोगों ने भरपूर सहयोग किया। कहीं भोजन की व्यवस्था की गई, तो कहीं जल सेवा और रात्रि विश्राम का प्रबंध किया गया। स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं के प्रति जो अपनत्व और आदर दिखाया, उसने इस यात्रा को और भी स्मरणीय बना दिया। यात्रा में शामिल लोग अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमियों से हैं, लेकिन सब एक समान भावना और उद्देश्य के साथ जुड़े हुए हैं मां के चरणों में समर्पण। यात्रियों का कहना है कि इस अनुभव ने उनके जीवन को एक नया दृष्टिकोण दिया है। इस यात्रा की सफलता और सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए आयोजकों ने अगले वर्षों में इसे और भी बड़े स्तर पर आयोजित करने की योजना बनाई है। श्रद्धालुओं की भावना है कि यह यात्रा एक परंपरा के रूप में स्थापित हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने।