माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में सोमवार को शारदीय नवरात्र की अष्टमी के उपलक्ष्य पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान के साथ मां चिंतपूर्णी का पूजन किया। अष्टमी के विशेष अवसर पर माता रानी को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए गए। इसके साथ ही मंदिर में नारियल की सात्विक बलि देने की परंपरा का भी निर्वहन किया गया। सोमवार को करीब 17 हजार श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में शीश नवाकर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की। माता चिंतपूर्णी मंदिर में आम दिनों में सुबह और शाम दो समय माता का स्नान, श्रृंगार और भोग लगाने की परंपरा है, लेकिन अष्टमी के दिन दोपहर के समय विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसी परंपरा के अनुसार सोमवार को भी मंदिर में दोपहर के समय विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान से पूजा संपन्न करवाई और माता रानी को 56 भोग अर्पित किए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। माता चिंतपूर्णी मंदिर में अष्टमी के अवसर पर नारियल का गोला काटकर सात्विक बलि देने की परंपरा निभाई गई। मंदिर अधिकारी संजीव प्रभाकर ने बताया कि अष्टमी के उपलक्ष्य पर मंदिर में पुजारियों द्वारा विशेष पूजा-अर्चना की गई।