जिला मुख्यालय से महज सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक गांव आज भी सड़क सुविधा से महरूम है। सोलन की धरोट पंचायत के आंजी गांव में किसी के बीमार पड़ने पर सबसे बड़ी चुनौती उसे अस्पताल तक पहुंचाना बन जाती है। यहां ग्रामीणों को मरीज को कंधों पर उठाकर कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। बीते दिनों गांव में एक महिला की तबीयत खराब हो गई। महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को डंडे के सहारे उसे कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा। करीब 7-8 लोगों ने मिलकर महिला को सड़क तक पहुंचाया, जिसके बाद उसे वाहन के माध्यम से अस्पताल ले जाया जा सका। आंजी गांव में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की आवाजाही में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है या किसी को आपात स्थिति में अस्पताल ले जाने की जरूरत होती है। वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाने के कारण मरीज को पहले पैदल रास्ते से मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। इसके लिए कई लोगों को एक साथ जुटना पड़ता है। बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए यह स्थिति और ज्यादा मुश्किल हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क पहुंचाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। ग्रामीणों ने संबंधित स्तर पर कई बार अपनी समस्या रखी, लेकिन अभी तक सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि जिला मुख्यालय के इतने नजदीक होने के बावजूद सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रहना चिंता का विषय है। उनका कहना है कि सड़क बनने से न केवल मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में आसानी होगी, बल्कि गांव के लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही भी सुगम हो जाएगी। आंजी गांव सोलन जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर की दूरी पर है। शहर के इतने नजदीक होने के बावजूद गांव में सड़क सुविधा का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। बारिश या किसी आपात स्थिति में यह परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि गांव को जल्द सड़क सुविधा से जोड़ा जाए, ताकि किसी मरीज को इलाज के लिए कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक न ले जाना पड़े।