ऐतिहासिक रेणुकाजी तीर्थ को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में रेणुका विकास बोर्ड ने ठोस कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में तीर्थ के सौंदर्य और पर्यावरणीय आकर्षण को बढ़ाने के उद्देश्य से परशुराम ताल (तालाब) में छह बतखें छोड़ी गई हैं। करीब एक दशक बाद ताल में बतखों की वापसी से पर्यटकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। परशुराम ताल में जलक्रीड़ा करती ये बतखें जहां पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं, वहीं स्वच्छ और सुखद पर्यावरण का संदेश भी दे रही हैं। ताल के किनारे पहुंचने वाले पर्यटक और परिवार बतखों के साथ अठखेलियां करते नजर आ रहे हैं, जिससे तीर्थ परिसर में रौनक बढ़ गई है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले परशुराम ताल में वन्य प्राणी विभाग द्वारा बतखें छोड़ी जाती थीं। हालांकि, बर्ड फ्लू की आशंकाओं के चलते बाद में इन्हें खुले में छोड़ने के बजाय पिंजरों में रखा जाने लगा था, जिससे पर्यटकों को बतखें केवल पिंजरे में ही देखने को मिलती थीं। अब रेणुका विकास बोर्ड ने अपने स्तर पर विशेष पहल करते हुए उत्तर प्रदेश से बतखों के तीन जोड़े (छह) मंगवाए हैं, जिन्हें ताल में छोड़ा गया है। बतखों के रात्रि विश्राम के लिए एक अलग कक्ष का निर्माण भी कराया गया है। रेणुका विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भरत सिंह ठाकुर ने बताया कि बोर्ड अध्यक्ष एवं रेणुकाजी के विधायक विनय कुमार के अथक प्रयासों से तीर्थ को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी योजना के तहत परशुराम ताल में बतखें छोड़ी गई हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर बतखों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा, पर्यटकों के आकर्षण और तीर्थ के समग्र विकास से जुड़ी अन्य योजनाओं पर भी चरणबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है।