अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के पहले दिन बुधवार सुबह से ही ढालपुर मैदान में विराजमान देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में पूजा-अर्चना शुरू हो गई है। सुबह सात बजे से देव समाज के लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। इस दौरान ढोल-नगाड़ों, नरसिंगों और करनाल की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया है। उत्सव में पहुंचे सैकड़ों देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में अगले सात दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान जारी रहेंगे। इस दौरान प्रतिदिन सुबह और शाम दो समय देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाएगी। ढालपुर मैदान में सुबह से ही देव परंपराओं और धार्मिक गतिविधियों का विशेष माहौल देखने को मिल रहा है। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और विधि-विधान से हो रही पूजा-अर्चना अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को दर्शाती है। कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उत्सव में देवी-देवताओं की उपस्थिति और उनके शिविरों में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान इस आयोजन को विशेष महत्व प्रदान करते हैं।