अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की दूसरी सांस्कृतिक संध्या में स्टार कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से खूब धमाल मचाया। फिल्मी गीतों, पहाड़ी संगीत, देशभक्ति गीतों और भजनों से सजी इस संध्या में कलाकारों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर लोकनृत्य उत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने राज्यपाल को कुल्लवी टोपी, मफलर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। सांस्कृतिक संध्या में गायक राजीव राजा ने अपने लोकप्रिय फिल्मी गीतों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। उन्होंने 'किसी के हाथ में हीरा, किसी के नाक में हीरा', 'सानू एक पल चैन न आवे', 'याद आ रहा है तेरा प्यार', 'मुझे टुकड़ों में नहीं जीना है' और 'अभी जिंदा हूं तो पी लेने दो' जैसे गीत प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। उन्होंने पहाड़ी गीतों की प्रस्तुतियों से भी दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। गायक तारिक मलिक ने 'आपके आ जाने से दिल बहल जाता मेरा' जैसे लोकप्रिय फिल्मी गीत से समां बांधा। इसके बाद उन्होंने देशभक्ति गीत 'दिल दिया है, जान भी देंगे, ऐ वतन तेरे लिए' प्रस्तुत कर माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। इस दौरान उन्होंने राज्यपाल से भी गीत की कुछ पंक्तियां गवाकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया। सूफी गायिका ममता जोशी ने 'शिव कैलाश के वासी' भजन से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने 'कौन कहता है भगवान आते नहीं', 'गोविंद बोलो, हरि गोविंद बोलो' और 'श्रीराम की गली, कुल्लू तुम जाना, नाचते मिलेंगे हनुमाना' जैसे भजनों की प्रस्तुति दी। उनके भजनों पर दर्शक भावविभोर नजर आए और सांस्कृतिक संध्या में भक्तिमय माहौल बन गया। अभिज्ञा बैंड के कलाकारों ने 'वंदे मातरम्', 'मां तुझे सलाम' और 'ले जाएं तुझे कहां हवाएं' सहित कई लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। बैंड के कलाकारों ने अपनी गायकी और संगीत से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय कलाकारों सहित हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कलाकारों ने भी प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने लोक संस्कृति और पारंपरिक संगीत की झलक पेश कर उत्सव की रौनक बढ़ाई। उनकी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया। कुल मिलाकर, कुल्लू दशहरा की दूसरी सांस्कृतिक संध्या में लोक संस्कृति, फिल्मी संगीत, सूफी गायकी और देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। स्टार कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं ने भी अपनी कला का प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।