निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज जोलसप्पड़ परिसर में बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां रैंप निर्माण के ठीक ऊपर से गुजर रही थ्री-फेज बिजली लाइन मजदूरों के लिए गंभीर खतरा बन गई है। बताया जा रहा है कि कई जगहों पर लाइन की ऊंचाई महज करीब पांच फीट रह गई है, जिससे मजदूरों को झुककर काम करना पड़ रहा है। परिसर में रोजाना दर्जनों मजदूर सरिया, शटरिंग, लोहे के पाइप और अन्य भारी उपकरणों के साथ काम कर रहे हैं, ऐसे में करंट लगने या बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है। निर्माण कंपनी की ओर से बिजली बोर्ड को इस लाइन को शिफ्ट करने के लिए तीन बार लिखित अनुरोध भेजा जा चुका है, लेकिन महीनों बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। निर्माण लगातार जारी रहने से मजदूरों को हर पल जोखिम के बीच काम करना पड़ रहा है। मजदूरों का कहना है कि नीचे झूलती बिजली लाइन के कारण काम करते समय हमेशा डर बना रहता है, क्योंकि किसी भी समय सरिया या लोहे का उपकरण लाइन के संपर्क में आ सकता है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है। फिलहाल परिसर में निर्माण चल रहा है, लेकिन आने वाले समय में यहां मेडिकल कॉलेज की ओपीडी शिफ्ट की जानी है। ऐसे में मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे यह खतरा केवल मजदूरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।