गोहाना। भावड़ गांव में आवंटित की गई कबड्डी नर्सरी में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। खिलाड़ी कच्ची जमीन पर अभ्यास कर अपना भविष्य निखारने का काम का रहे हैं। नर्सरी में करीब 41 लड़के और लड़कियां नियमित रूप से अभ्यास करने आते हैं, जिनमें से कई खिलाड़ी जूनियर और सब-जूनियर प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। ग्रामीण प्रतिभाओं का निखारने के लिए सरकार ने ग्राम स्तर पर खेल नर्सरियां आवंटित की हुई हैं। भावड़ गांव में राजकीय स्कूल को कबड्डी नर्सरी आवंटित हुई है। गांव के बड़े बुर्जुगों से लेकर छोटे एवं युवाओं की पहली पसंद कबड्डी ही है। स्कूल में आवंटित हुई नर्सरी में पर्याप्त मेट की सुविधा नहीं है। मेट पर केवल एक टीम के खिलाड़ी ही अभ्यास कर सकते हैं। ऐसे में दूसरी टीमों को अभ्यास करने के लिए इंतजार करना पड़ता है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी अब पूरी तरह से मेट पर खेली जाती है। मेट छोटा होने के चलते नर्सरी के खिलाड़ी कच्ची जमीन पर अभ्यास कर रहे हैं। इससे खिलाड़ियों के चोटिल होने का जोखिम तो बना ही रहता है, साथ ही जब वे प्रतियोगिताओं में मेट पर खेलने उतरते हैं, तो उन्हें तालमेल बिठाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गांव की लड़कियों की भी पसंद बनी कबड्डी कबड्डी खेल में गांव की लड़कियां भी रूचि ले रही हैं। नर्सरी में कुल 41 खिलाड़ी हैं, जिनमें से 10 खिलाड़ी लड़कियां हैं। लड़कियां प्रतिदिन अभ्यास कर अपनी हुनर निखारने का काम कर रही हैं। इसके साथ ही खेलों में सक्रियता से उनमें आत्मविशवास भी बढ़ा है। खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने में ग्रामीण कर रहे हैं सहयोग गांव के राजकीय स्कूल में कबड्डी नर्सरी आवंटित हुई है। नर्सरी शुरू होने के बाद से ही गांव के बच्चों की कबड्डी में रूचि बढ़ी है। नर्सरी में सरकार की तरफ से सामान उपलब्ध नहीं करवाया गया है। खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने में ग्रामीण सहयोग कर रहे हैं। भतेरी, कोच, कबड्डी नर्सरी, भावड़