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20 रुपये की बचत से शुरू किया सफर, आज हरियाणा सहित दूसरे राज्यों तक पहुंच रहा महिलाओं का हुनर

महेंद्रगढ़। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी सफलता की राह में बाधा जरूर बन सकती है, लेकिन यदि हौसला और कुछ नया सीखने की ललक हो तो इन्हीं परिस्थितियों में सफलता की कहानी लिखी जा सकती है। इसकी मिसाल गांव बवानिया की लघु उद्यमी बनारसी देवी हैं, जिन्होंने वर्ष 2001 में महज 20 रुपये की बचत से आत्मनिर्भरता का सफर शुरू किया। आज वे स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को काम से जोड़ने और उनके उत्पादों को हरियाणा के साथ दूसरे राज्यों तक पहुंचाने में योगदान दे रही हैं। दरअसल, शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शहर के राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यम विद्यालय में अपराजिता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बतौर मुख्य वक्ता बनारसी देवी और विशेष वक्ता पाथेड़ा की सोनिया ने छात्राओं के साथ अपने संघर्ष, अनुभव और सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए केवल नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय अपने हुनर को पहचानना और उसे रोजगार में बदलना जरूरी है। बनारसी देवी ने बताया कि शुरुआती दिनों में उनके पास न तो जमीन थी और न ही आर्थिक संसाधन। उन्होंने सिलाई और कढ़ाई का काम सीखा और इसी हुनर को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया। पढ़ाई नहीं कर पाने के बावजूद उन्होंने मेहनत और अनुभव से काम करना सीखा। वर्ष 2001 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 20 रुपये की बचत से शुरुआत की। इस दौरान वे मोटे अनाज व अन्य प्रकार के अनाज से खाद्य पदार्थ बनाने लगी। धीरे-धीरे महिलाओं को समूहों में जोड़कर काम आगे बढ़ाया। आज गांव में समूह बनाकर महिलाएं सामूहिक रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण और कम ब्याज पर ऋण की सुविधा मिलती है। ग्राम संगठन बनाने के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाती है। समूह के माध्यम से ऋण लेकर महिलाएं अपना काम शुरू कर सकती हैं और किस्तों में उसे वापस कर सकती हैं। इसके लिए जरूरी है कि महिलाएं पहले प्रशिक्षण लें और समूह के साथ मिलकर काम करें। सोनिया देवी ने भी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने समूह के साथ काम करने, लोन, बिक्री आदि की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हुनर और आत्मविश्वास के बल पर महिलाएं अपनी पहचान बना सकती हैं। उपप्राचार्या डॉ. शिवभावना ने बताया कि आत्मविश्ववास ही मंजिल पाने की पहली सीढ़ी होती है। किसी भी काम को शुरू करने के लिए पहले आत्मविश्वासी बनें और फिर उस काम को मन लगाकर करें। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने लघु उद्योग शुरू करने, प्रशिक्षण प्राप्त करने, ऋण लेने और उत्पादों की बिक्री से जुड़े सवाल भी पूछे। इस दौरान शिक्षिका अर्चना ने कार्यक्रम की सराहना की और छात्राओं से इनको परिजनों के साथ साझा करने का आह्वान किया।

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