किसान... बहलोलपुर गांव के मेहताब का कहना है कि फसल किसान की खराब हुई है, तो नुकसान भी किसान का ही होगा, लेकिन आम आदमी भी सीधे किसानों से ही जुड़ा हुआ है। हमें घाटा होगा तो बाजार में धान और चावल की कमी होगी। अगर ऐसा होता है तो चावल के दाम बढ़ेंगे और आम आदमी का बजट बिगड़ेगा। आढ़ती... सुरेंद्र ने बताया कि मंडियों में धान भीगने से उसकी खरीद और मिलिंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसके चलते बाजार में नया चावल आने में देरी होती है, जिससे अस्थायी तौर पर किल्लत हो सकती है। इस कारण चावल के दाम बढ़ने लाजीमि हैं। इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ता है। कृषि उपनिदेशक... डाॅ. जसविंद्र सिंह का कहना है कि धान भीगने से सबसे ज्यादा नुकसान किसान को ही होता है। इसका ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव जरूर पड़ता है। जब किसान आर्थिक संकट में आता है, तो ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आम मजदूरों को काम मिलना कम हो जाता है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होती है।