हिंदी सिनेमा में कभी अंडरवर्ल्ड के इशारों पर फिल्मों के सौदे होते थे। जिस किसी डिस्ट्रीब्यूटर के लिए भाई का फोन आता, प्रोड्यूसर को झक मारकर ये फिल्म उसे ही देनी होती। अब हिंदी सिनेमा में कॉरपोरेट कल्चर हावी है। प्रोड्यूसर सौ करोड़ की फिल्म बनाता है। किसी इंटरनेशनल प्रोडक्शन हाउस के बंदे को सेट करता है, 20-25 करोड़ उसे देकर फिल्म दो सौ करोड़ की ऑन टेबल बेच देता है। ऐसी ही एक डील का पता अमर उजाला टीवी को लगा है, देखिए ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।