जिस कलाकार ने पांच दशक तक कैमरे के सामने अपनी कला को जिया... जिसने एक नहीं, कई भाषाओं में किरदारों को अपनी आवाज और अपने अभिनय से पहचान दी... आज उसी अनंत नाग को भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान ने सलाम किया है। 22 सितंबर 2026 का दिन अनंत नाग के फिल्मी सफर में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। गुजरात के एकता नगर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। मंच पर जब अनंत नाग पुरस्कार लेने पहुंचे तो पूरा सभागार तालियों और स्टैंडिंग ओवेशन से गूंज उठा। ये सिर्फ एक अवॉर्ड नहीं था... ये पांच दशक की साधना, संघर्ष और सिनेमा के प्रति समर्पण को मिला सम्मान था।
अनंत नाग ने साल 1973 में कन्नड़ फिल्म 'संकल्प' से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। एक कलाकार के तौर पर शुरू हुआ ये सफर देखते ही देखते भारतीय सिनेमा की एक लंबी और यादगार यात्रा में बदल गया।
पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में अनंत नाग ने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। इनमें करीब 250 फिल्में कन्नड़ सिनेमा की हैं। लेकिन उनकी कला किसी एक भाषा या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, मलयालम और अंग्रेजी फिल्मों में भी अपनी अभिनय प्रतिभा का परिचय दिया।
उनके किरदारों की खासियत यही रही कि पर्दे पर वह जिस भूमिका में आए, उसे सिर्फ निभाया नहीं... बल्कि उसमें अपनी एक अलग छाप छोड़ दी। यही वजह है कि अनंत नाग को कन्नड़ सिनेमा के सबसे सम्मानित और प्रभावशाली कलाकारों में गिना जाता है।
और अब उनके इसी योगदान को देश के सबसे बड़े फिल्म सम्मान ने पहचान दी है। कुछ दिन पहले ही भारत सरकार की ओर से अनंत नाग के नाम का ऐलान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के लिए किया गया था। 16 सितंबर को यह जानकारी सामने आई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी थी और भारतीय सिनेमा, खासकर कन्नड़ सिनेमा में उनके दशकों लंबे योगदान को याद किया था।
22 सितंबर को जब सम्मान देने की बारी आई, तो अनंत नाग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मानित हुए। उन्हें स्वर्ण कमल पदक और शॉल प्रदान किया गया। इसके साथ उन्हें 10 लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी दी गई।
लेकिन शायद किसी कलाकार के लिए पुरस्कार की रकम से ज्यादा मायने उस पल के होते हैं, जब उसके दशकों के काम को पूरा देश सलाम करता है। अनंत नाग के लिए भी मंच पर मिला स्टैंडिंग ओवेशन ऐसा ही पल रहा।
एक ऐसा कलाकार, जिसने 1973 में एक फिल्म से शुरुआत की और फिर पांच दशक तक लगातार अपनी पहचान बनाई। बदलते दौर, बदलती कहानियां और बदलती पीढ़ियों के बीच अनंत नाग का अभिनय सफर जारी रहा।
उनकी कहानी सिर्फ एक अभिनेता के सम्मान की कहानी नहीं है। ये उन कलाकारों के लिए भी प्रेरणा है, जो कैमरे के सामने आने का सपना देखते हैं। क्योंकि अनंत नाग का सफर बताता है कि महानता किसी एक फिल्म, एक किरदार या एक सफलता से नहीं बनती... इसके लिए वर्षों की मेहनत, निरंतरता और अपने हुनर के प्रति ईमानदारी चाहिए।
आज दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के साथ अनंत नाग के उस लंबे सफर को देश ने सलाम किया है, जिसकी पहली सीढ़ी 1973 में 'संकल्प' से शुरू हुई थी।