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Vishwa Kavya: ईरानी कवि सबीर हका की 3 चुनिंदा कविताएं

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
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                                                  1-

जैसे कफ़न ढंक देता है लाश को
बर्फ़ भी बहुत सारी चीज़ों को ढंक लेती है।
 
ढंक लेती है इमारतों के कंकाल को
पेड़ों को, क़ब्रों को सफ़ेद बना देती है

और सिर्फ़ बर्फ़ ही है जो
सरहदों को भी सफ़ेद कर सकती है।

2- 
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मृत्यु से डर...

ताउम्र मैंने इस बात पर भरोसा किया
कि झूठ बोलना ग़लत होता है
ग़लत होता है किसी को परेशान करना

ताउम्र मैं इस बात को स्वीकार किया
कि मौत भी ज़िन्दगी का एक हिस्सा है

इसके बाद भी मुझे मृत्यु से डर लगता है
डर लगता है दूसरी दुनिया में भी मज़दूर बने रहने से।

3- 

बन्दूक़ का आविष्कार...

अगर उन्होंने बन्दूक़ का आविष्कार न किया होता
तो कितने लोग, दूर से ही,
मारे जाने से बच जाते।
  
कई सारी चीज़ें आसान हो जातीं।
 
उन्हें मज़दूरों की ताक़त का अहसास दिलाना भी
कहीं ज़्यादा आसान होता।

अँग्रेज़ी से अनुवाद - गीत चतुर्वेदी

एक वर्ष पहले
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