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विश्व काव्य

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Vishwa Kavya: जिम्बाब्वे के निर्वासित कवि चेन्जेराई होव की कविता- इनकार

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
                                                                
                                                    पुलिस जब आ ही जाए ऐन सिर पर
और उसकी लाठी नृत्य करने लगे
तुम्हारी पीठ पर
इनकार कर देना झुकने से ।

बिच्छू जब आ ही जाएँ
और डंक मार दें चाहे
तुम्हारी आँखों और कानों पर
इनकार कर देना उनके वश में आने...और पढ़ें
1 week ago

Vishwa Kavya: फ़िलिस्तीनी कवि महमूद दरवेश की कविता-  जब पत्थर थे मेरे शब्द

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
                                                                
                                                    जब मिट्टी थे मेरे शब्द
मेरी दोस्ती थी गेहूँ की बालियों से

जब क्रोध थे मेरे शब्द
ज़ंजीरों से दोस्ती थी मेरी

जब पत्थर थे मेरे शब्द
मैं लहरों का दोस्त हुआ

जब विद्रोही हुए मेरे शब्द
...और पढ़ें
4 months ago
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Vishwa Kavya: जर्मन मूल के चर्चित अमेरिकी कवि चार्ल्स बुकोवस्की की कविता- अगर कुछ करना है

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
                                                                
                                                    अग़र कुछ करना है
तो कर डालो
वरना शुरू भी मत करना!

अग़र कुछ करना है
तो कर डालो
भले ही तुमसे छूट जाए
तुम्हारी प्रेमिका
या पत्नी
या नौकरी
या फ़िर तुम्हारा दिमाग

लेकिन...और पढ़ें
4 months ago

Vishwa Kavya: बर्तोल्त ब्रेख्त की कविता- लड़ाई शुरू हो गई और राह बेहद मुश्किल

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
                                                                
                                                    लड़ाई शुरू हो गई और राह बेहद मुश्किल
पर तुम मेरे साथ चल रहे हो, मेरे हमराह !
कहीं चढ़ाई है यहाँ, कहीं ढलान, राह पंकिल
पर हम मंज़िल को छुएँगे, मन में है उछाह

हम दोनों भाग रहे हैं और मंज़िल एक हमारी
तेज़ी से ब...और पढ़ें
5 months ago
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Vishwa Kavya: ईरानी कवि अहमद शामलू की कविता- वे सूँघने लगते हैं तुम्हारी सांसें

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
                                                                
                                                    वे सूँघने लगते हैं तुम्हारी सांसें
ऐसा तो नहीं तुमने कहा हो : मैं प्यार करता हूँ ।

वे सूँघने लगते हैं तुम्हारा हृदय –
(कितना विचित्र समय है, मेरे प्रिय)
और वे चाबुक लगाते हैं प्रेम को
हर नाके पर ।
...और पढ़ें
5 months ago

Rudyard Kipling: प्रसिद्ध कवि की हिंदी में अनूदित कविता 'ये सारा जहां और इस जहां का सब कुछ तुम्हारा है'

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
                                                                
                                                    अगर
अगर तुम तब भी अपने दिमाग पर काबू रख सकते हो
जब सभी बेकाबू होकर तुम्हे दोष दे रहें हों।
अगर तुम खुद पर भरोसा रख सकते हों जब सब तुम पर शक करें
परन्तु उनकी शिकायतों को भी तवज़्ज़ो दे सकते हो।
अगर तुम प्रतीक्षा कर सकत...और पढ़ें
9 months ago

Motivational Poetry: वर्जिनिया वुल्फ़ की कविता- चाहे कुछ भी हो जाए, पर ज़िन्दा रहो

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
                                                                
                                                    चाहे कुछ भी हो जाए, पर ज़िन्दा रहो ।
मौत आने से पहले मत मरो।
ख़ुद को खोने मत दो, उम्मीद डुबोने मत दो,
अपनी दिशा को गुम होने मत दो।

ज़िन्दा रहो,
ख़ुद अपने आप के साथ, अपने शरीर की हर थाप के साथ,
अपनी त्...और पढ़ें
10 months ago

नेपाली कवि रमेश क्षितिज की कविता- अभी और नए पात्र फिर दिखेंगे रंगमंच पर

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
                                                                
                                                    वो अन्त नहीं जैसा तुमने सोचा
अभी और नए पात्र फिर दिखेंगे रंगमंच पर
आएगा एक और नया मोड़
मध्यान्तर के बाद — फिर छलकेगा नया रंग
और तुम्हारे सिर पर गिरेंगी प्रकाश की फुहारें

कहानी अभी अधूरी है !

न...और पढ़ें
11 months ago

रेनर मारिया रिल्के की मशहूर कविता- प्रेम 

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
                                                                
                                                    अनजाने परों पर आसीन
मैं
स्वप्न के अंतिम सिरे पर

वहाँ मेरी खिड़की है
रात्रि की शुरूआत जहाँ से होती है

और
वहाँ दूर तक मेरा जीवन फैला हुआ है
 ...और पढ़ें
1 year ago

Vishwa Kavya: ईरानी कवि  फ़रोग फ़रोखज़ाद की कविता- बंदी

काव्य डेस्क

Vishwa Kavya
                                                                
                                                    मैं तुम्हें चाहती हूँ हालाँकि मालूम है
कभी अपने सीने से लगा नहीं पाऊंगी तुम्हें
स्वच्छ और चमकीले आकाश हो तुम
और मैं अपने पिंजरे के इस कोने में
दुबकी हुई एक बंदी चिड़िया।

सर्द और काली सलाखों के पीछे से
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1 year ago
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