नज़र झुकाकर देखने का तुम्हारा अंदाज़ है जरा अलहदा
तिरंगे की मानिंद सबको समेट लेते हो अपने आगोश में।
तुम्हारी मुहब्बत की तरह ही नज़र आती है आज़ादी मुझे
मिल तो गई है बेपनाह, अब संभालने को रहना है होश में।
जैसे तुम्हारी याद के सहारे दिल में बनाते हैं रोज एक तस्वीर
वैसे ही मुल्क को सजाने फिर निकलें तो सही, नए जोश में।
योगेश एन. दीक्षित की फेसबुक वाल से साभार