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हसरत मोहानी: मथुरा कि नगर है आशिक़ी का

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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मथुरा कि नगर है आशिक़ी का


दम भरती है आरज़ू इसी का
हर ज़र्रा-ए-सर-ज़मीन-ए-गोकुल
दारा है जमाल-ए-दिलबरी का
बरसाना-ओ-नंद-गाँव में भी
देख आए हैं जल्वा हम किसी का
पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ था
हर नग़्मा-ए-कृष्ण बाँसुरी का
वो नूर-ए-सियाह या कि हसरत
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