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Hasrat Mohani Ghazal: न सही गर उन्हें ख़याल नहीं, कि हमारा भी अब वो हाल नहीं

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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न सही गर उन्हें ख़याल नहीं


कि हमारा भी अब वो हाल नहीं

याद उन्हें वादा-ए-विसाल नहीं
कब किया था यही ख़याल नहीं

ऐसे बिगड़े वो सुन के शौक़ की बात
आज तक हम से बोल-चाल नहीं

मुझ को अब ग़म ये है कि बाद मिरे
ख़ातिर-ए-यार बे-मलाल नहीं

हम पे क्यूँ अर्ज़-ए-हाल-ए-दिल पे इताब
एलची को कहीं ज़वाल नहीं

सुन के मुझ से वो ख़्वाहिश-ए-पाबोस
हँस के कहने लगे मजाल नहीं

दिल को है याद शौक़ का वो हुनर
जिस से बढ़ कर कोई कमाल नहीं

आप नादिम न हों कि 'हसरत' से
शिकवा-ए-ग़म का एहतिमाल नहीं
3 वर्ष पहले
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