विज्ञापन

Munir Niyazi Poetry: देती नहीं अमाँ जो ज़मीं आसमाँ तो है

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  देती नहीं अमाँ जो ज़मीं आसमाँ तो है 
कहने को अपने दिल से कोई दास्ताँ तो है 

यूँ तो है रंग ज़र्द मगर होंट लाल हैं 
सहरा की वुसअ'तों में कहीं गुल्सिताँ तो है 

इक चील एक मुम्टी पे बैठी है धूप में 
गलियाँ उजड़ गई हैं मगर पासबाँ तो है 

आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए 
वर्ना ये उम्र भर का सफ़र राएगाँ तो है 

मुझ से बहुत क़रीब है तू फिर भी ऐ 'मुनीर' 
पर्दा सा कोई मेरे तिरे दरमियाँ तो है 
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10257 कविताएं

View Profile