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जब नेहरू ने कहा उर्दू के बारे में मेरी ज़ाती राय और है, और मेरी गवर्नमेंट की राय और...

रत्नेश मिश्र

Mud Mud Ke Dekhta Hu
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                                                  पंडित जवाहरलाल नेहरू से जुड़े एक रोचक किस्से का ज़िक्र मशहूर शायर जोश मलीहाबादी ने अपनी आत्मकथा 'यादों की बारात' में की है। वे लिखते हैं- 

नेहरू जी को उर्दू ज़बान से बड़ी मुहब्बत थी। उन्होंने मुझसे एक दिन कहा था कि उर्दू के बारे में मेरी ज़ाती राय और है, और मेरी गवर्नमेंट की राय और है। लेकिन मैं गवर्नमेंट पर अपनी राय थोपना नहीं चाहता, इसलिए कि यह मामला डेमोक्रेसी के खिलाफ़ है।
 
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एक रोज़ लखनऊ स्टेशन पर उन्होंनेे रेलवे अफ़सरों को बुलाकर बहुत बुरी तरह फटकारकर कहा कि आप लोगो ने मुझे निरा जाहिल बनाकर रख दिया है। हर तरफ़ हिंदी के बोर्ड लगे हुए है। कुछ पता नहीं चलता कि यह खाने का कमरा है या लैवेटरी।

एक बार पाकिस्तान से रुख़सत लेकर मैं जब दिल्ली में उनसे मिला तो उन्होंने बड़े तंज़ के साथ मुझसे कहा था, ''जोश साहब, पाकिस्तान को इस्लाम, इस्लामी कल्चर और इस्लामी ज़बान यानि उर्दू की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन अभी कुछ दिन हुए, मैं पाकिस्तान गया और वहां यह देखा कि मैं शेरवानी और पायजामा पहने हुए हूं, लेकिन वहां की गवर्नमेंट के तमाम अफ़सर सौ फ़ीसदी अंग्रेज़ों का लिबास पहने हुए है। मुझसे अंग्रेज़ी बोली जा रही है और हद यह है कि मुझे अंग्रेज़ी में संबोधित भी किया जा रहा है। 

मुझे इस सूरते - हाल से बेहद सदमा हुआ और मैं समझ गया कि ' उर्दू - उर्दू - उर्दू ' के जो नारे हिन्दुस्तान में लगाए गए थे, वे सारे ऊपरी दिल से और खोखले थे। जब मैं खड़ा हुआ तो मैंने उसका उर्दू में जवाब देकर सबको हैरान और परेशान कर दिया, और यह बात साबित कर दी कि मुझे उनके मुक़ाबिले में उर्दू से कहीं ज़्यादा मुहब्बत है।

जोश साहब, माफ़ कीजिए, आपने जिस उर्दू के लिए अपना वतन तंज़ दिया, पाकिस्तान में उसे कोई मुंह नहीं लगाता। और जाइए पाकिस्तान?'' मैंने शर्म से आंखे नीचे कर लीं। उनसे तो कुछ नहीं कहा, लेकिन उनकी बातें सुनकर मुझे एक घटना याद आ गई। 

मैंने पाकिस्तान के एक बड़े शानदार मिनिस्टर साहब को जब उर्दू में ख़त लिखा और उन साहब बहादुर ने अंग्रेज़ी में जवाब भेजा तो मैंने जवाबुल-जवाब में यह लिखा था कि जनाबे - वाला मैंने आपको अपनी मादरी ज़बान में खत लिखा था, लेकिन आपने उसका जवाब अपनी पिदरी ( बाप की) ज़बान में तहरीर फ़रमाया है -

चू कुफ्र अज काबा बरख़ेज़द कुजा मानद मुसलमानी
(अगर काबा ही से कुफ्र उठने लगे तो इस्लाम कहां जाए ?)

 
6 वर्ष पहले
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