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ये हैं गीतकार शैलेन्द्र के लिखे 5 बेहतरीन नग़्मे

दीपाली अग्रवाल

Mere Azeez Filmi Nagme
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बॉलीवुड गीतों की फ़ेहरिश्त में जब भी उन गीतों को क्रमबद्ध किया जाएगा जो लोगों के दिल को छूकर उनकी ज़ुबान पर चढ़ गए तब उन गीतों में गीतकार शैलेन्द्र के लिखे नग़्मे शामिल ना हों ऐसा असंभव है। बॉलीवुड को बेहतरीन नग़्मे लिखकर उसे एक नई ऊंचाई देने वाले गीतकार शैलेन्द्र को याद करते हुए पेश हैं उनकी बगिया से कुछ चुने हुए फूल

फ़िल्म: अनाड़ी 
गायक: मुकेश
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: नूतन, राज कपूर

किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार
किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार
किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार
जीना इसी का नाम है

माना अपनी जेब से फ़कीर हैं
फिर भी यारों दिल के हम अमीर हैं
मिटे जो प्यार के लिये वो ज़िन्दगी
जले बहार के लिये वो ज़िन्दगी
किसी को हो न हो हमें तो ऐतबार
जीना इसी का नाम है


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पान खाये सैंयाँ हमारो

फ़िल्म: तीसरी कसम 
गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: वहीदा रहमान, राज कपूर

पान खाये सैंयाँ हमारो
साँवली सूरतिया होंठ लाल-लाल
हाय-हाय मलमल का कुरता
मलमल के कुरते पे छींट लाल-लाल
पान खाये सैंयाँ हमारो
(हमने मँगाई सुरमेदानी
ले आया ज़ालिम बनारस का ज़रदा)

अपनी ही दुनिया में खोया रहे वो
हमरे दिल की न पूछे बेदर्दा
पूछे बेदर्दा

चलत मुसाफ़िर मोह लियो रे

फ़िल्म: तीसरी कसम 
गायक: मन्ना डे
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: वहीदा रहमान, राज कपूर

चलत मुसाफ़िर मोह लियो रे पिंजड़े वाली मुनिया –
उड़ उड़ बैठी हलवइया दुकनिया 
हे रामा!
उड़ उड़ बैठी हलवइया दुकनिया
आरे!
(बरफ़ी के सब रस ले लियो रे
पिंजड़े वाली मुनिया) –
अ हे अ हे… हे रामा
उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया –
आहा
उड़ उड़ बैठी बजजवा दुकनिया
आरे!
(कपड़ा के सब रस ले लियो रे
पिंजड़े वाली मुनिया) 

आज फिर जीने की तमन्ना है

फ़िल्म: गाइड 
गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: एस. डी. बर्मन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: वहीदा रहमान, देव आनंद

काँटों से खींच के ये आँचल
तोड़ के बंधन बांधे पायल
कोई न रोको दिल की उड़ान को
दिल वो चला ह ह हा हा हा हा
(आज फिर जीने की तमन्ना है
आज फिर मरने का इरादा है) –

कल के अंधेरों से निकल के
देखा है आँखें मलके मलके
फूल ही फूल ज़िंदगी बहार है
तय कर लिया अ अ आ आ आ आ
आज फिर जीने…

अजीब दास्ताँ है ये

फ़िल्म: दिल अपना और प्रीत पराई (1960)
संगीत: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेन्द्र
गायिका: लता मंगेशकर


अजीब दास्ताँ है ये
कहाँ शुरू कहाँ ख़तम
ये मंजिलें है कौन सी
न वो समझ सके न हम

ये रौशनी के साथ क्यूँ
धुंआ उठा चिराग से
ये ख्वाब देखती हूँ मैं
के जग पड़ी हूँ ख्वाब से
अजीब..


7 वर्ष पहले
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