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Social Media Poetry: होठों पर मल्हार राग है

वायरल काव्य
                
                                                         
                            होठों  पर   मल्हार   राग   है 
                                                                 
                            
साँस  साँस  में  भरी  आग है 
मन  के  भीतर  कोलाहल है 
धड़कन धड़कन दौड़ भाग है

मेरी नींद अचानक खुल जाती  है  आधी  रात  में 
तुम होते तो तुमसे कहता अपने  मन की  बात मैं

तुम   होते   तो  सारे   सपने   सच  हो  जाते  मेरे
सच हो  जाते  मंदिर  मंदिर  किए  गए  सब  फेरे
खुलकर भीग रहे होते हम सावन की  बरसात  में 

सावन  की  बरसात  वही  वृंदावन  नदी   किनारे 
नदी  किनारे   बैठा   हूँ   मैं    राधे   बिना  तुम्हारे
बिना  तुम्हारे  उलझ  गया  हूँ कैसे  झंझावात  में 

झंझावातों से  लड़  लेते हम दोनों  मिल जुल कर
मिलजुल कर हम दोनों सुंदर कर  लेते अपना घर
अपना   घर  सपनों  से सुंदर होता  हर हालात में

अब  तुम  नहीं  सिर्फ़  यादें  हैं  वादे  हैं कुछ बातें
मुस्कानें  अल्हड़पन  सिहरन   चुभन अधजगी रातें
अच्छा होता रोक लिया होता ख़ुद को शुरुआत में 

साभार: प्रवीण पाण्डेय की फेसबुक वाल से 

एक दिन पहले

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