विज्ञापन

मोहब्बत की सुहानी रस्म...जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा 

काव्य डेस्क

Mere Azeez Filmi Nagme
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  प्रदीप कुमार और बीना रॉय अभिनीत फिल्म 'ताजमहल' का गीत जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा...जादुई बोल तथा लाजवाब संगीत की वजह से सभी के दिल में खास जगह रखता है। 1963 में रिलीज इस फिल्‍म में गायकी के सरताज मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर ने आवाजें दी हैं। यह गीत जैसे मोहब्बत की सुहानी रस्म को निभाता हुआ प्रतीत होता है। गीत साहिर लुधियानवी ने लिखा है। हिंदुस्तान में मोहब्बत का जिक्र हो और साहिर लुधियानवी का नाम लबों में न आए ऐसा हो ही नहीं सकता। लिहाजा यह गीत साहिर के अंदर की रुमानियत को शिद्दत से बयां करता है। रोशन के संगीत ने इस गीत को अमर कर दिया है। प्रेम के दो दीवानों के लिए यह प्रार्थना की तरह है।    
                                                              
                  

                    
                                        
                         
                                                                                   
                            
                         
                                                            
                                
विज्ञापन

रोके ज़माना चाहे रोके खुदाई तुमको आना पड़ेगा...

जीवन में आदमी अपने 'वचनों' के लिए जाना जाता है। मोहब्बत में तो 'वचन' यानी वादे ही बुनियाद होते हैं। प्रेम की पहली सीढ़ी विश्वास है। इस गीत में इसी विश्वास को हसीन लफ्जों में व्यक्त किया गया है। गीत में साफ कहा गया है कि जमाना तुम्हे रोके इसके बाद भी प्रेम की एक आवाज पर तुम्हे आना ही होगा। साहिर ने लिखा है कि 'तरसती निगाहों' ने आवाज दी है। मतलब साहिर कह रहे हैं आंखों की आवाज में 'आवाज' नहीं होती है। लेकिन इसके बाद भी इसे प्रेमी को सुनना ही होगा। गीत में बोल हैं आंखों के अलावा मुहब्बत की राह भी आवाज दे रही है। ऐसी आवाजों को दरकिनार करने के लिए यह गीत एक चुनौती है। 

जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा
रोके ज़माना चाहे रोके खुदाई तुमको आना पड़ेगा
जो वादा…

तरसती निगाहों ने आवाज़ दी है
मुहब्बत की राहों ने आवाज़ दी है
जान-ए-हया, जान-ए-अदा छोड़ो तरसाना तुमको आना पड़ेगा
जो वादा…

 

ये माना हमें जाँ से जाना पड़ेगा...

ऐसी आवाज सुनकर दूसरा साथी कहता है कि हमें जां से भी जाना पड़े इसकी परवाह नहीं...हम तो बस इतना समझते हैं कि तुम्हारी एक 'आवाज' में हमें आना ही पड़ेगा। गीत में कहा गया है कि जो नहीं आएगा] वह अपनी वफा में इलजाम लेगा। मोहब्बत में इलजाम से बड़ा कोई अपराध नहीं है। गीत कह रहा है कि जिसे दिल दे दिया है ये जान भी उसी के लिए है। और यही मुहब्बत के सफल होने की पहली शर्त है। इश्क को साहिर सौदा कहते हैं। जिसकी अंतिम कीमत जान होती है। गीत के बोल 'जब इश्क का सौदा किया फिर क्या घबराना तुमको आना पड़ेगा'... मुझे काफी अच्छे लगते हैं। इन बोलों की वजह से यह गीत मुझे विशेष तौर पर पसंद है।    

ये माना हमें जाँ से जाना पड़ेगा
पर ये समझ लो तुमने जब भी पुकारा हमको आना पड़ेगा
जो वादा…

हम अपनी वफ़ा पे ना इलज़ाम लेंगे
तुम्हें दिल दिया है तुम्हे जाँ भी देंगे
जब इश्क़ का सौदा किया फिर क्या घबराना तुमको आना पड़ेगा
जो वादा…

चमकते हैं जब तक ये चाँद और तारे...

गीत में प्रेमी युगल शपथ लेकर कहते हैं कि जब तक आसमां में चांद-सितारे चमकते रहें तब तक हमारे वादे अटूट रहेंगे। सलामत रहेंगे। गीत में प्रेमी सारे जमाने को चुनौती देते नजर आते हैं। यही इस गीत की सबसे खासियत है।  यह गीत प्रेम करने वालों को जमाने के सितम का सामना करने के लिए ढेर सारा हौसला देता है। 

चमकते हैं जब तक ये चाँद और तारे
न टूटेंगे अब एहद-ओ-पैमां हमारे
इक दूसरा जब दे सदा होके दीवाना हमको आना पड़ेगा
जो वादा…

हमारी कहानी तुम्हारा फ़साना
हमेशा हमेशा कहेगा ज़माना
कैसे भला कैसी सज़ा देदे ज़माना हमको आना पड़ेगा
जो वादा…

जो इसमें सफल होते हैं बाद में उनकी हर हथकड़ी खुल जाती है...

प्रेम में हारने के लिए जमाना आपको बहलाएगा, फुसलाएगा फिर आक्रामक ढंग से आपका विरोध भी करेगा। आपको रोकेगा। लेकिन आपको इस 'आवाज' को सुनते हुए वादा निभाना होगा यही आपके प्रेम की पहली चुनौती है। जो इसमें सफल होते हैं बाद में उनकी हर हथकड़ी खुल जाती है। सारा जहां उनके लिए एक गुलजार चमन हो जाता है।   

सभी एहल-ए-दुनिया ये कहती है हमसे
कि आता नहीं कोई मुड़के अदम से
आज ज़रा शान-ए-वफ़ा देखे ज़माना तुमको आना पड़ेगा
जो वादा…

बहुत जी लगाया ज़माने से हमने
बहुत वक़्त काटा बहाने से हमने
जब से हुआ तुमसे जुदा ये दिल न माना तुमको आना पड़ेगा
जो वादा किया

हम आते रहे हैं हम आते रहेंगे
मुहब्बत की रसमें निभाते रहेंगे
जान-ए-वफ़ा तुम दो सदा फ़िर क्या ठिकाना हमको,
आना पड़ेगा
जो वादा…

आप भी इस गीत को यहां सुनिए और मोहब्बत में डूब जाइए-

 
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ramesh Raj

36 कविताएं

View Profile