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मैं नशेमन कहूं,कि आशियाना कहूं।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कैसे भुलाऊं, मैं दर-ओ-बाम घर के।
        
                                                    
                            
याद आते हैं सुबह-ओ-शाम घर के।।

मैं नशेमन कहूं,कि आशियाना कहूं।
तसव्वुर में बसे हैं, सब नाम घर के।।
-यूनुस खान
5 घंटे पहले
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