कैसे भुलाऊं, मैं दर-ओ-बाम घर के।
याद आते हैं सुबह-ओ-शाम घर के।।
मैं नशेमन कहूं,कि आशियाना कहूं।
तसव्वुर में बसे हैं, सब नाम घर के।।
-यूनुस खान