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बलिदान और मर्यादा का संदेश जगाता रहता है।

Yash Chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज्वाला की गोद में हँसकर, रानी ने मान सँभाला था,
        
                                                    
                            
चित्तौड़ की पावन धरती ने साहस का दीप ज्वाला था।

जब लोभ भरी दृष्टि ने नारी-गरिमा को ललकारा था,
तब वीरांगना ने अग्नि को अपना अंतिम सहारा था।

सोने के महल मिट जाएँ, पर सम्मान नहीं झुकता है,
संकट के घोर अँधेरों में स्वाभिमान सदा दिखता है।

पद्मावती की अमर गाथा इतिहास सुनाता रहता है,
बलिदान और मर्यादा का संदेश जगाता रहता है।
एक महीने पहले
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