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इश्क़ दफ़न है कहीं दिल के कोने में

Vishu King

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क़ दफ़न है कहीं दिल के कोने में
        
                                                    
                            
कहीं सामने आए तो राज़ ना खुल जाए

पन्ने भर पलट-पलट कर तेरी तारीफ़ लिखी
मगर हम तुम्हें चाहते हैं ये लिख न पाए

आए तो थे तेरे शहर में हम
लेकिन तुमसे मुलाक़ात हो न पाए

सच्चा वाला इश्क़ किया था हमने
लेकिन तुम पूरा कर भी न पाए

शयन से उठता हर रोज़ सुबह
बस तेरी ही याद आए

प्यार तो था मगर कह नहीं पाए

तक़ल्लुफ़ इश्क़ की हम नुमाइश कर न पाए
आरज़ू भी थी तमन्नाएँ भी थीं
मगर तुम मेरी आशिकी को समझ न पाए

जब तक देखा चेहरा ज़ुल्फ़ों से हटाके
लगा चाँद का टुकड़ा ज़मीं पे उतर आए

बात हुई थी दिल लगाने की
लेकिन तुम नज़रें भी न मिला पाए

प्यार तो था मगर कह नहीं पाए

रुक कर पूछ लिया होता श्रुति हाल ए दिल
अब भी तड़प है तेरे प्यार में
क्या पता वो इश्क़ तुम्हें दोबारा हो जाए

प्यार तो था मगर हम कह नहीं पाए।
2 घंटे पहले
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