मां , तू कहती है — सो जा
देख, सो गया आसमान,
सो गए तारे,
बादलों की चादर ओढ़
सो गया वो चाँद…
माँ,
हर किसी को उसके हिस्से की चादर मिली,
फिर मेरे और तेरे हिस्से की चादर कहाँ है?
माँ मुस्कुराई…
और पल भर में
अपना आँचल छुड़ाकर
लाल को ओढ़ाई
और बोली —
ये ले तेरे हिस्से का चादर
मेरे हिस्से की चादर
जब तू कमा कर लाएगा
तब ओढ़ लूँगी…
हम दोनों हँसते हुए
सोने लगे
उस खुले आसमान के नीचे,
एक-दूसरे के
सपनों को
चुपचाप बुनते हुए…।
- विशाल राय