मुझे खुद पता नहीं
मै किधर जा रहा हूं मुझे खुद पता नहीं ,
मैं किसको चाह रहा हूं मुझे खुद पता नहीं ,
मैं मानता उसको हूं ,
वो मानती उसको है ,
मैं चाहता उसको हूं ,
वो चाहती उसको हैं ,
मैं उसके लिए रोता हूं ,
वो उसके लिए रोती हैै ,
मैं उसको खो रहा हूं ,
वो उसको खो रही हैं ,
मैं उसको पाना चाहता हूं ,
वो उसको पाना चाहती हैै ,
मेरी चाहत अधूरी रह जाएगी ,
उसकी भी चाहत अधूरी रह जाएगी ,
न मैं मुक्कमल हो पाऊंगा ,
न वो मुक्कमल हो पाएगी ,
हे इश्क मुझे खुद पता नहीं ,
मैं किधर जा रहा हूं.....
विकास मिश्रा
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